राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. मामला गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को बीमा के नाम पर जाल में फंसाकर उनकी मौत को हादसा दिखाने की कथित साजिश से जुड़ा हुआ है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई अकेली घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा था, जिसके तार गुजरात से लेकर राजस्थान तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है.
पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और कई अहम दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं. तीन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में डर और चर्चा का माहौल बना हुआ है.
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गरीब लोगों को बनाया जाता था निशाना
सूत्रों के अनुसार, गिरोह खासतौर पर गरीब, मजदूर, रेहड़ी चलाने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाता था. पहले उन्हें शराब की लत लगाई जाती थी. इसके बाद उनके नाम पर बड़ी रकम की बीमा पॉलिसी करवाई जाती थी. बताया जा रहा है कि बीमा की किश्तें भी गिरोह से जुड़े लोग ही भरते थे.
जब व्यक्ति लगातार शराब पीने और बीमारी की वजह से कमजोर हो जाता था, तब उसकी मौत को “दुर्घटना” दिखाकर बीमा क्लेम लेने की साजिश रची जाती थी. पुलिस को शक है कि यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है.
दीपक कुमार की मौत से खुला पूरा मामला
पूरा मामला 36 वर्षीय दीपक कुमार की संदिग्ध मौत के बाद सामने आया. दीपक मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला था. जानकारी के मुताबिक, वह पहले तिपहिया वाहन चलाता था, लेकिन कोरोना काल में पत्नी की मौत के बाद उसकी जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो गई थी. बाद में वह मजदूरी करने लगा.
मृतक के 12 वर्षीय बेटे दिव्यांशु ने पुलिस और डॉक्टरों को बताया कि मोहल्ले में रहने वाले विशाल नाम के युवक ने उसके पिता को शराब पीने की आदत लगा दी थी. धीरे-धीरे दीपक की तबीयत खराब रहने लगी. बताया गया कि इलाज के बहाने कुछ लोग दीपक को अहमदाबाद से राजस्थान लेकर निकले थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.
मौत को करंट हादसा दिखाने की कोशिश
मामले का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब सामने आया, जब मृतक की मां चंपा देवी और बेटे दिव्यांशु ने पुलिस को पूरी कहानी बताई. उनके अनुसार, दीपक की मौत के बाद साथ आए लोगों ने शव के साथ छेड़छाड़ की.
शरीर पर करंट लगने जैसे निशान बनाने के लिए पैर के अंगूठे और उंगली को जलाया गया. इतना ही नहीं, छाती दबाकर मुंह से खून निकालने की कोशिश भी की गई, ताकि मौत को करंट लगने से हुई दुर्घटना साबित किया जा सके.
दादी और पोते को भी धमकाया गया. उन्हें कहा गया कि अगर कोई पूछे तो बताना कि दीपक खेत में मोटर चालू करते समय करंट लगने से घायल हुआ था. बताया गया कि अखेपुरा गांव में सिंचाई के दौरान हादसा हुआ. इसके बाद आधी रात में शव को मांडल उप जिला चिकित्सालय में छोड़ दिया गया और साथ आए लोग वहां से फरार हो गए.
डॉक्टरों की सतर्कता से खुली पोल
मांडल अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों को मामला शुरू से ही संदिग्ध लगा. डॉक्टरों ने देखा कि शव पर ईसीजी के निशान थे और शरीर की हालत भी सामान्य करंट हादसे जैसी नहीं लग रही थी. इसी दौरान डॉक्टरों ने मृतक के बेटे दिव्यांशु से बातचीत की. मासूम बच्चे ने बिना डरे पूरी कहानी बता दी. बच्चे की बात सुनते ही डॉक्टरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी.
इसके बाद मांडल पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई. बाद में पता चला कि मामला भीलवाड़ा शहर के गांधीनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसके बाद गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी गई.
गांधीनगर थानाधिकारी पुष्पा कसौटिया अपनी टीम के साथ अस्पताल पहुंचीं और मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल कार को जब्त कर लिया है. साथ ही तीन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
मृतक का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया और शव को अहमदाबाद भेज दिया गया. पुलिस अब बीमा पॉलिसी, बैंक रिकॉर्ड और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में मामला पूरी तरह संदिग्ध दिखाई दे रहा है. मृतक पहले से बीमार था, लेकिन उसकी मौत को दुर्घटना साबित करने की कोशिश की गई.
कई और मामलों के खुलासे की आशंका
पुलिस को शक है कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है. जांच में ऐसे कई और मामलों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है, जहां गरीब लोगों को बीमा के लालच में फंसाकर उनका इस्तेमाल किया गया हो.
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दिव्यांशु ने यह भी बताया कि आरोपी उनके इलाके में कई लोगों का बीमा करवाते थे. शराब और पैसे उपलब्ध करवाने का काम भी वही लोग करते थे. इससे पुलिस को अंदेशा है कि पूरा नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हो सकते हैं.
अब पूरे मामले में सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है. अगर जांच में गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा होता है, तो यह राजस्थान और गुजरात दोनों राज्यों में बड़ा मामला बन सकता है.
