Bhilwara News: सिस्टम खुद बीमार! बागोर अस्पताल में डॉक्टरों की की, फार्मासिस्ट गायब, तड़पते मरीज
Bhilwara News In Hindi: बागोर राजकीय चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. अस्पताल में 5 डॉक्टरों और फार्मासिस्ट की कमी के कारण मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना फेल साबित हो रही है.

'दवा की कतार में उम्मीदें बीमार, अस्पताल खुद उपचार की प्रतीक्षा में.' राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बागोर स्थित राजकीय चिकित्सालय पर यह लाइन बिल्कुल सटीक बैठती है. हिट वेव और मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना यहां मरीजों के लिए 'धैर्य परीक्षा केंद्र' बन गई है. अस्पताल परिसर किसी राहत केंद्र से ज्यादा संघर्ष स्थल नजर आता है, जहां कमजोर और बीमार मरीज दवा के लिए घंटों लाइनों में पसीना बहा रहे हैं.
अस्पताल की इस बदहाली की सबसे बड़ी वजह है फार्मासिस्ट का अभाव. पिछले पांच दिनों से यहां के एकमात्र फार्मासिस्ट राजेश कुमार राव को डेप्युटेशन पर राजकीय सैटेलाइट अस्पताल कोटड़ा (अजमेर) भेज दिया गया है. सबसे बड़ा व्यंग्य यह है कि राज्य सरकार एक ओर डेप्युटेशन पर रोक लगाने के सख्त आदेश जारी करती है, वहीं दूसरी ओर संयुक्त निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, अजमेर जोन) ने नियमों को दरकिनार करते हुए 27 अप्रैल 2026 को यह डेप्युटेशन आदेश जारी कर दिया. क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
Jaipur News: डेयरी संचालक के साथ युवकों ने की मारपीट, पुलिस ने 2 आरोपियों को दबोचा
नर्सिंग स्टाफ के भरोसे दवा वितरण
फार्मासिस्ट के न होने से बागोर चिकित्सालय में दवा वितरण व्यवस्था “राम भरोसे” चल रही है. हालात ये हैं कि मरीजों की देखभाल करने वाले नर्सिंग स्टाफ को मजबूरी में फार्मासिस्ट की भूमिका निभानी पड़ रही है. बिना विशेषज्ञता के दवा वितरण की यह व्यवस्था मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ साबित हो सकती है.
6 में से 5 डॉक्टरों के पद खाली
विडंबना यहीं खत्म नहीं होती, इस चिकित्सालय में स्वीकृत 6 डॉक्टरों के पदों में से 5 पद खाली पड़े हैं. यानी महज 1 डॉक्टर के कंधों पर 150 से 200 मरीजों का आउटडोर और रोजाना 10-12 इमरजेंसी मरीजों को देखने की जिम्मेदारी है. ऐसे में यहां इलाज 'सेवा' कम और 'संघर्ष' ज्यादा बन गया है.
बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर मरीज
अव्यवस्था का आलम यह है कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल रही है. मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के बावजूद मरीजों को बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं. सरकारी योजना का लाभ “कागजों में मुफ्त” और जमीन पर “महंगा सौदा” बन गया है. अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद सो रहा स्वास्थ्य विभाग इस “बीमार व्यवस्था” का इलाज कब करता है.
Rajasthan News: प्रसूताओं की मौत पर भजनलाल सरकार सख्त, कोटा मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टर-नर्स सस्पेंड

























