Rajasthan News: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCR) में हवा की गुणवत्ता खराब होने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्रदूषण फैलाने वाले औधोगिक इकाइयों को बंद करने के साथ कई कड़े फैसले लिए हैं. दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को देखते हुये वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर में भी कई प्रतिबन्ध लगाए हैं. दिल्ली में प्रदुषण के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है. दो दिन पहले तक दिल्ली की एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 472 था. बताया गया है कि 450 से ज्यादा AQI को फेफड़ों के लिए खतरनाक माना जाता है.
खनन से जुड़े कामों पर लगी रोकदिल्ली की हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब होने के कारण दिल्ली सरकार ने डीजल के वाहनों पर रोक लगा दी है. दिल्ली की वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए ट्रकों का दिल्ली में प्रवेश बंद कर दिया है. दिल्ली में अब आवश्यक सेवाओं को छोड़कर डीजल से चलने वाले माध्यम माल वाहन और भारी माल वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से उनके गंतव्य स्थानों पर पहुंचना होगा. दिल्ली एनसीआर में निर्माण कार्य जैसे हाइवे, रोड कंट्रेक्शन, फ्लाईओवर, पाइप लाइन पर भी रोक लगाई जा रही है.
भरतपुर में भी लागू होगी गाइडलाइनवहीं राजस्थान के अलवर जिले को एनसीआर में होने का काफी फायदा मिला है. राजस्थान का अलवर जिला शुरू में ही एनसीआर में शामिल हो गया था लेकिन भरतपुर जिला 1 जुलाई 2013 को एनसीआर में शामिल किया गया था. अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड द्वारा कोई भी गाइडलाइन जारी की जाती है तो उसकी पालना प्रशासन द्वारा कराई जाती है. वहीं एनसीआर में होने के कारण अलवर जिले का काफी विकास हुआ है. एक समय था जब अलवर भरतपुर से काफी पीछे था लेकिन एनसीआर में शामिल होने से अलवर जिले को काफी फायदा पहुंचा है.
आतिशबाजी का कारोबार हुआ खत्म अगर बात करें भरतपुर जिले की तो जब से भरतपुर एनसीआर में शामिल हुआ है एक भी प्रोजेक्ट पर काम नहीं हुआ जिससे ऐसा लगता की भरतपुर जिले को एनसीआर का नुकसान हुआ है. वहीं अब एनसीआर की गाइडलाइन के अनुसार खनन और खनन से जुड़ी गतिविधियों पर अग्रिम आदेश तक रोक लगाई गई है. इससे सैकड़ों लोगों पर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. अब भरतपुर वासियों को इस बात का इन्तजार है की कब भरतपुर एनसीआर से बाहर होगा. एनसीआर क्षेत्र में जब से भरतपुर आया है तब से अतिशबाजी का कारोबार खत्म हो गया है.
भरतपुर जिले को आतिशबाजी के लिए मिनी शिवाकाशी के रूप में जाना जाता था. भरतपुर जिले के हजारों लोग आतिशबाजी के कारोबार से जुड़ कर अपने परिवार का लालन पालन कर रहे थे. अब उनको अन्य क्षेत्र में काम तलाशना पद रहा है.