राजस्थान विधानसभा के पांचवें सत्र के दौरान मंगलवार (3 फरवरी) हरीश चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने इशारों इशारों में बड़ा सियासी बयान दे डाला. उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है.

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दरअसल मंगलवार (3 फरवरी) हरीश चौधरी विधानसभा में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने बाड़मेर और बालोतरा जिले में हुए परिसीमन को लेकर कहा, "मुख्यमंत्री जी आप बाड़मेर और बालोतरा को अलग करके क्या हरीश चौधरी को रोक लोगे? पहले भी कई मुख्यमंत्री रोक रहे थे, थार की जनता चाहेगी तो भविष्य में भी हरीश चौधरी आएगा."

क्या हैं इसके सियासी मायने?

बता दें हरीश चौधरी बायतु सीट से विधायक हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी भी हैं. मंगलवार को हरीश चौधरी का यह बयान अब फिर से थार की राजनीति में उबाल ला सकता है. इसके पीछे बड़ी वजह पिछले दिनों जैसलमेर बाड़मेर के नेताओं की कांग्रेस में फिर से वापसी से जोड़कर देखी जा रही है. 

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मैवाराम जैन-अमीन खान की कांग्रेस में वापसी से थे नाराज

मैवाराम जैन और अमीन खान की कांग्रेस में वापसी को लेकर हरीश चौधरी ने नाराजगी जाहिर की थी. अमीन खान पर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ने का आरोप था तो वहीं मेवाराम जैन को आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के चलते पार्टी से बाहर किया गया था. इसके बावजूद बीते दिनों दोनों ही नेताओं की फिर से कांग्रेस में वापसी हुई.

गहलोत गुट के माने जाते हैं दोनों नेता

बाड़मेर जैसलमेर जिले की कांग्रेस में आपसी टकराव की बात कोई छुपी हुई नहीं है, ऐसे में इन दोनों नेताओं की वापसी के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की भूमिका मानी जाती है. हरीश चौधरी इन दोनों नेताओं की वापसी के समर्थन में नहीं थे, अमीन खान और मैवाराम जैन दोनों को अशोक गहलोत गुट का माना जाता है.

अब हरीश चौधरी का ये बयान कि उन्हें एक पूर्व मुख्यमंत्री भी विधानसभा नहीं पहुंचने देना चाहते थे, सियासी जानकार उनके इस इशारों को अशोक गहलोत से जोड़कर देख रहे हैं. फिलहाल कांग्रेस के अंदरखाने क्या चल रहा है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.