राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है. बीजेपी नेताओं को बेटों को राजनीति से दूर रखने की सलाह देने वाले उनके बयान पर पहले बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया था. खासतौर पर वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने इस पर पलटवार करते हुए गहलोत पर ‘पुत्र मोह’ और कांग्रेस सरकार के फैसलों को लेकर सवाल उठाए थे.

अब इस पूरे विवाद पर खुद अशोक गहलोत ने अपनी सफाई दी है और बीजेपी को सीधा जवाब दिया है. गहलोत ने साफ किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया.

उन्होंने कहा, "मैंने कहा कि अपने बेटों को सरकार से दूर रखें. मैंने ये नहीं कहा कि राजनीति से दूर रखें. मैंने अपने बेटे को अलग मकान किराए पर दिलाया था, वे अलग रहे थे, मुख्यमंत्री आवास में नहीं रहे."

परिवार को राजनीति में आने की दी खुली सलाह

गहलोत ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि वे परिवार के लोगों के राजनीति में आने के खिलाफ नहीं हैं. उन्होंने बीजेपी नेताओं को खुलकर अपने परिवार के सदस्यों को आगे लाने की सलाह दी.

उन्होंने कहा, "मैं तो कहना चाहूंगा मुख्यमंत्री जी को और तमाम मंत्रियों को, BJP को, अपने परिवार वालों को आगे लाओ. बेटा हो, बेटी हो, साला हो, साली हो, कोई हो, लाओ आगे. उनके अंदर जो है, वे आगे आएंगे तो नई पीढ़ी को भी लाभ मिलेगा."

विपक्ष के सम्मान की भी दी नसीहत

गहलोत ने इस मुद्दे पर बीजेपी को लोकतांत्रिक मर्यादा का भी पाठ पढ़ाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि उन पर हमला करना चाहिए. उन्होंने कहा, "इसलिए बीजेपी को चाहिए कि कम से कम विपक्ष को सम्मान देना सीखे. वो कोई सवाल उठाते हैं तो उन्हें जवाब दो. यही जनता आपसे अपेक्षा करती है."

सियासत में बयान को लेकर बढ़ा विवाद

दरअसल, गहलोत के मूल बयान को लेकर बीजेपी ने इसे परिवारवाद से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी. लेकिन अब गहलोत ने खुद सामने आकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उनका मकसद राजनीति से दूर रखने की बात कहना नहीं था, बल्कि सरकार के कामकाज से दूरी बनाए रखने की सलाह देना था.