राजस्थान के अलवर सीमा क्षेत्र के अजबगढ़ के समीप स्थित रामजी का ग्वाडा गांव में ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया. 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला चमेली देवी को परिजनों और ग्रामीणों ने मृत समझ लिया था. रातभर घर में मातम पसरा रहा, रिश्तेदारों को सूचना दे दी गई और सुबह अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो गईं. अंतिम दर्शन से ठीक पहले महिला के शरीर में हलचल होने लगी.

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यह दृश्य देखकर घर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई. परिजन तुरंत महिला को दौसा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें ICU में भर्ती कर उपचार शुरू किया. अब महिला की हालत में सुधार बताया जा रहा है.

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अंतिम यात्रा की तैयारियों के बीच दोबारा जीवित हो गई महिला

महिला के पुत्र बाबूलाल मीणा ने बताया कि मंगलवार रात अचानक उनकी मां की तबीयत बिगड़ गई थी. कुछ देर बाद शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी और सांसें इतनी धीमी पड़ गईं कि सभी ने उन्हें मृत मान लिया. इसके बाद उन्हें चारपाई से उतारकर जमीन पर लिटा दिया गया और रिश्तेदारों को सूचना भेज दी गई. रातभर गांव में शोक का माहौल बना रहा. सुबह जब अंतिम यात्रा की तैयारियां चल रही थीं और लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे, तभी महिला के पैरों में हल्की हरकत दिखाई दी. पहले किसी को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन दोबारा शरीर में मूवमेंट होने पर परिजनों के होश उड़ गए. आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया. 

महिला का अस्पताल में इलाज जारी

दौसा जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. आरके मीणा ने बताया कि महिला की सांसें बेहद धीमी हो गई थीं, जिसके कारण उन्हें मृत समझ लिया गया. अस्पताल में सीटी स्कैन सहित अन्य जांच करवाई गई हैं. सीटी स्कैन रिपोर्ट सामान्य आई है, लेकिन ब्लड में संक्रमण की शिकायत सामने आई है. महिला को ICU में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है और उनकी हालत पहले से बेहतर है. डॉक्टरों के अनुसार अब महिला चल-फिर भी रही है. परिजनों ने बताया कि चमेली देवी को पहले से सांस संबंधी तकलीफ थी.

महिला को 2 अप्रैल 2026 को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 3 मई को छुट्टी मिली थी. इसके बाद 4 मई की रात अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिवार का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय पुष्टि की आवश्यकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि कई गंभीर बीमारियों में शरीर की गतिविधियां अत्यंत धीमी हो जाती हैं. ऐसे में बिना चिकित्सकीय पुष्टि किसी को मृत मान लेना खतरनाक साबित हो सकता है.  

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