पंजाब में एसजीपीसी अध्यक्ष चुनाव में एक बार फिर से एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बाजी मार ली है. हरजिंदर पांचवीं बार एसजीपीसी के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं. उन्होंने बागी ग्रुप के मिट्ठू सिंह काहनेके को हराया है. मिट्ठू सिंह को महज 18 वोट ही मिले.

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एसजीपीसी के मुख्य कार्यालय के तेजा सिंह समुंद्री हाल में हुए जनरल इजलास में एसजीपीसी अध्यक्ष के चुनाव में हरजिंदर सिंह धामी को 117 वोट हासिल हुए. मिट्ठू सिंह काहनेके को 18 वोट जबकि एक वोट रद्द हो गया.

'सेवा का मौका देने के लिए शुक्रिया'

वहीं जीत के बाद इस मौके एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने एसजीपीसी सदस्यों और पार्टी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि उन सभी का आभार जिन्होंने मुझे दोबारा सेवा करने के योग्य समझा और मेरी कोशिश होगी कि इस सेवा को तनदेही से निभा सकूं.

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ये प्रस्ताव किए पास

उन्होंने आगे कहा कि आज कुछ प्रस्ताव पास किए गए है, जिसमें मुख्य तौर पर बंदी सिखों की रिहाई के लिए मुहिम शुरू करना, पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए जो मौजूदा स्थिति बनी हुई है उससे निपटना और करतारपुर कॉरिडोर दोबारा से खोलने के लिए केंद्र सरकार से राब्ता बनाना होगा.

'अकाली दल सिखों की पहली पसंद'

वहीं हरजिंदर सिंह धामी के दोबारा अध्यक्ष चुने जाने पर अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले अकाली दल के उम्मीदवार की बड़े अंतर से जीत से साबित होता है कि अकाली दल ही राजनीतिक और धार्मिक तौर पर सिखों की पहली पसंद है. उन्होंने कहा कि इस जीत के साथ अकाली दल का आम लोगों में वर्चस्व और ज्यादा बढ़ेगा और इसका असर तरन तारन के उप चुनाव में भी पड़ेगा.

एसजीपीसी के चुनाव पर उन्होंने ये भी कहा कि हमारे पास तो पहले से ही बहुमत है. हम तो चाहते हैं कि एसजीपीसी के चुनाव हों, लेकिन यह देश के गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है. वह जब चाहे यह चुनाव करवा दें अकाली दल इसके लिए तैयार है.