पंजाब: अपनी ही पार्टी में घिरे रवनीत बिट्टू, आतंकवाद और 'सतलुज' फिल्म विवाद पर BJP नेताओं ने दी ये नसीहत
Punjab News: विधानसभा चुनाव से आठ महीने पहले पंजाब में आतंकवाद के दौर पर सियासत तेज हो गई है. जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को OTT से हटाने के बाद नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है.

विधानसभा चुनाव से ठीक आठ महीने पहले पंजाब में 80 और 90 के दशक के आतंकवाद के काले दौर को लेकर सियासत अचानक तेज हो गई है. यह पूरी बहस मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म "सतलुज" (Satluj) को लेकर शुरू हुई है.
इस फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद, राज्य में आतंकवाद के दौर में हुए फर्जी पुलिस एनकाउंटर्स और खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा बेगुनाह लोगों की हत्या का मुद्दा एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है.
फिल्म 'सतलुज' पर रवनीत सिंह बिट्टू ने खोला मोर्चा
केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने "सतलुज" फिल्म के खिलाफ कड़ा ऐतराज जताया है. बिट्टू का आरोप है कि फिल्म में एकतरफा और भ्रामक इतिहास दिखाया गया है. उन्होंने फिल्म के उस दावे पर भी सवाल उठाया है, जिसमें कहा गया है कि पंजाब पुलिस ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लगभग 25 हजार बेगुनाह सिख नौजवानों को मार दिया था. बिट्टू का कहना है कि इस फिल्म के जरिए जानबूझकर 25 साल पुराने जख्मों को कुरेदने की कोशिश की जा रही है.
अपनी ही पार्टी के नेताओं ने दी बिट्टू को नसीहत
रवनीत बिट्टू के इस बयान के बाद उनकी ही पार्टी (BJP) के नेताओं ने उन्हें सोच-समझकर बोलने की नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि आज जरूरत पुराने जख्मों पर मलहम लगाने की है, न कि उन्हें कुरेदने की. उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उस वक्त गायब हुए सभी नौजवानों के मामलों की जांच की थी, और सारा डेटा आयोग के पास मौजूद है. वरिष्ठ बीजेपी नेता कालिया ने भी कहा कि फिल्म सही है या गलत, इस बहस से ज्यादा जरूरी यह है कि हम आतंकवाद के उस दौर को भुलाकर राज्य में आपसी भाईचारा मजबूत करें और पंजाब को आगे ले जाएं.
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'जख्मों को कुरेदने के बजाय बेहतरी के लिए काम करें'
पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को धर्म के नाम पर लड़ने और पुराने जख्मों को कुरेदने के बजाय पंजाब की तरक्की और बेहतरी के लिए मिलकर काम करना चाहिए.
परमजीत कौर खालड़ा ने हर राजनीतिक पार्टी को घेरा
फिल्म 'सतलुज' विवाद के बीच मरहूम मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने मानवाधिकारों के मुद्दे पर सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने अपने 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर लिखा:
- कांग्रेस: उनके शासनकाल में मानवाधिकारों का हनन हुआ और मासूम नौजवानों का कत्ल किया गया.
- शिरोमणि अकाली दल: जिन पुलिस अधिकारियों पर मानवाधिकार हनन के गंभीर आरोप थे, उन्हें अकाली शासन में बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां और पद दिए गए.
- आम आदमी पार्टी (AAP): उन्होंने भगवंत मान सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पति (जसवंत खालड़ा) के कत्ल के मामले में सजायाफ्ता पुलिस अधिकारी जसपाल सिंह को जमानत कैसे मिल गई?
- केंद्र सरकार (BJP): उन्होंने एफबीआई (FBI) की उस जांच का भी जिक्र किया, जिसमें केंद्र पर विदेशों में व्यक्तियों की 'टारगेटेड किलिंग' के आरोप लगाए गए हैं.
चुनाव से पहले फिल्म 'सतलुज' से निकली इस सियासी चिंगारी ने पंजाब की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है. अब देखना यह है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में क्या असर डालता है.
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