देश में आगामी परिसीमन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. केंद्र सरकार नारी वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण नियम 2029 चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी कर रही है. इसी क्रम में देश भर में परिसीमन भी होगा. ऐसे में राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बदल सकती है. पंजाब में भी संसदीय सीटों की संख्या बढ़ेगी. पंजाब में सीटों की संख्या 13 से बढ़कर 20 हो सकती है.

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देश में पहला आम चुनाव 1951–52 में हुआ था. उस समय लोकसभा की कुल 489 सीटें थीं. उस दौर में पंजाब का भौगोलिक स्वरूप आज जैसा नहीं था, क्योंकि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश बाद में अलग राज्य बने. उस समय संयुक्त पंजाब क्षेत्र से लोकसभा की लगभग 18 निर्वाचन क्षेत्र  हुआ करते थे.

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1951 चुनाव में पंजाब में कितनी सीटें थीं?

1951 के चुनाव में पंजाब में निम्न सीटें थीं

- अंबाला-शिमला- करनाल- रोहतक- झज्जर-रेवाड़ी- गुड़गांव- हिसार- फाजिल्का-सिरसा- फिरोजपुर-लुधियाना- नवां शहर- जालंधर- होशियारपुर- कांगड़ा- गुरदासपुर- तरन तारन- अमृतसर

बता दें इसमें 12 सीटों पर 1 और 3 सीटों पर 2 सांसद चुने जाते थे.

1970 के दशक तक लोकसभा की निर्वाचित सीटें बढ़कर 543 हो गईं. इसी दौरान 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए राज्यों के बीच सीटों को फ्रीज कर दिया गया.  उस समय तक पंजाब का पुनर्गठन हो चुका था और राज्य में लोकसभा की 13 सीटें तय हो गई थीं.

इसके बाद भारत का परिसीमन आयोग ने 2002 में परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की औ 2008 में नई सीमाएं लागू कीं, लेकिन सीटों की कुल संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया.  

वर्तमान में पंजाब की 13 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से 4 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.

पंजाब में फिलहाल यह 13 सीटें हैं जिसमें- गुरदासपुर- अमृतसर- खडूर साहिब- जालंधर (अनुसूचित जाति)- होशियारपुर (अनुसूचित जाति)- आनंदपुर साहिब- लुधियाना- फतेहगढ़ साहिब (अनुसूचित जाति)- फरीदकोट (अनुसूचित जाति)- फिरोजपुर- बठिंडा- संगरूर- पटियाला शामिल है.

अब 2026 के बाद संभावित नए परिसीमन को लेकर चर्चा तेज है. ऐसे में पंजाब की संसदीय सीटों की संख्या और उनकी सीमाओं में भी परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है.  (डेस्क इनपुट के साथ)