चंडीगढ़ में पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार पर कर्मचारियों और पेंशनर्स के मुद्दे पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि डीए बढ़ोतरी को लेकर सरकार का रवैया पूरी तरह कर्मचारी विरोधी है और पहली बार ऐसा हुआ है कि सरकार ने डीए लागू करने के बजाय कोर्ट में जाकर उसे चुनौती दी है.

सुनील जाखड़ ने कहा, यह आदेश इस सरकार द्वारा नहीं दिया गया है और सरकार इस डीए बढ़ोतरी को लागू करने या इसकी घोषणा करने के लिए बाध्य नहीं है. यह फंड की उपलब्धता पर भी निर्भर करता है, अन्यथा यह केवल एक नीतिगत मामला है और इसे नहीं उठाया जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकार खुद अदालत में जाकर यह दलील दे रही है कि डीए बढ़ोतरी लागू करना जरूरी नहीं है.

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4 लाख पेंशनर्स का मामला कोर्ट तक पहुंचा

जाखड़ ने कहा कि करीब 4 लाख पेंशनर्स की डीए बढ़ोतरी को लेकर पंजाब सरकार कोर्ट तक पहुंच गई. इसके अलावा सरकार ने कई और कोशिशें भी कीं. उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि 30 जून तक कर्मचारियों और पेंशनर्स की करीब 15 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी की जाए.

भाजपा नेता ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि किसी सरकार ने डीए बढ़ोतरी की घोषणा होने के बाद उसे लागू नहीं किया, बल्कि अदालत में जाकर उसके खिलाफ अपील दायर कर दी. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने माथे पर एक और कलंक लगाया है और पंजाब को भी इसमें शामिल कर दिया है.

सरकार की अपील पर भी उठाए सवाल

जाखड़ ने सरकार की अपील का जिक्र करते हुए कहा, “सरकार इस आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं है. डीए बढ़ोतरी की घोषणा करना जरूरी नहीं है और यह फंड की उपलब्धता पर निर्भर करता है. अगर हमारे पास पैसे होंगे तो देंगे, वरना यह सिर्फ एक नीतिगत मामला है और इसे लागू करना जरूरी नहीं है.”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने PSPCL यानी पावर कॉरपोरेशन को भी आगे कर दिया और उनसे भी हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील डलवाई. सरकार की तरफ से कहा गया कि 30 जून तक भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं.

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जाखड़ ने बताया कि हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, “यह कोई एहसान नहीं है, यह कोई इनाम नहीं है, यह कर्मचारियों का अधिकार है.” उन्होंने अदालत के इस फैसले को कर्मचारियों और पेंशनर्स के अधिकारों की रक्षा करने वाला बड़ा फैसला बताया.

साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत मान को याद दिलाते हुए जाखड़ ने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे अब टूटते नजर आ रहे हैं और सरकार लगातार अपने वादों से पीछे हट रही है.