पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान अभी खत्म होती नहीं दिख रही है. पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के चंडीगढ़ दौरे के दूसरे दिन भी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी नेताओं ने उनके कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी. इससे एक बार फिर पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

Continues below advertisement

मंगलवार (7 जुलाई) को भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के साथ अहम बैठक की. बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, हाल ही में नियुक्त 3 कार्यकारी अध्यक्षों में से राजकुमार वेरका और सुखविंदर सिंह डैनी, पार्टी के संगठन महासचिव, कोषाध्यक्ष और कई जिला अध्यक्ष मौजूद रहे.

हालांकि तीसरे कार्यकारी अध्यक्ष और चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी माने जाने वाले संगत सिंह गिलजियां इस बैठक में शामिल नहीं हुए. इसके अलावा कम से कम दो जिला अध्यक्ष भी बैठक से नदारद रहे. इन नेताओं की गैरमौजूदगी को पंजाब कांग्रेस की जारी गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है.

Continues below advertisement

Punjab Politics: पंजाब में कलह से कैसे उभरेगी कांग्रेस? पूर्व सीएम ने बता दिया फॉर्मूला!

राजा वडिंग ने बताया निजी कारण

बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने नेताओं की गैरहाजिरी को ज्यादा तूल देने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि कुछ नेता निजी कारणों और पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके. पार्टी पूरी तरह एकजुट है और संगठन को मजबूत करने पर काम कर रही है.

अपने दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा और वरिष्ठ नेता राजकुमार वेरका से उनके घर जाकर मुलाकात भी की. माना जा रहा है कि बघेल पंजाब कांग्रेस में चल रही नाराजगी को दूर करने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं.

भूपेश बघेल 5 दिन के चंडीगढ़ दौरे पर हैं. ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके गुट के अन्य नेताओं से भी मुलाकात करेंगे या नहीं. यदि ऐसी बैठक होती है तो इससे पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद कम होने के संकेत मिल सकते हैं.

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह के बीच भूपेश बघेल पहुंचे चंडीगढ़, चरणजीत सिंह चन्नी ने बनाई दूरी

वहीं, दोनों गुटों से दूरी बनाए हुए नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस में जो कुछ भी चल रहा है, वह केवल पावर पॉलिटिक्स का हिस्सा है. उनके मुताबिक हर नेता पार्टी में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है. उन्होंने भरोसा जताया कि चुनावी समय आने पर सभी नेता एक मंच पर नजर आएंगे और पार्टी को इसका कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा.