कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एचएस फुल्का के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने को बुधवार को 'सहजीवी अवसरवाद' करार दिया और दावा किया कि इसका एक दिन सुर्खियों में बने रहने के अलावा राज्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. वडिंग ने एक बयान में आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी की 'बाहर से नेताओं को शामिल करने की बेताबी' को दर्शाता है.

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उन्होंने कहा, ‘‘अपने दम पर सरकार बनाने की इच्छा रखने वाली पार्टी को ‘बाहरी लोगों’ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.’’ वडिंग ने आरोप लगाया कि पंजाब में बीजेपी के अधिकांश नेता अन्य पार्टियों से आए हैं और उन्होंने ऐसे कई नेताओं के नाम भी बताए. कांग्रेस नेता ने कहा कि वह बीजेपी के बारे में फुल्का के पुराने बयानों पर चर्चा नहीं करेंगे, लेकिन दावा किया कि वे टिप्पणियां अभी भी लोगों की यादों में ताजा हैं.

'सिख समाज एचएस फुल्का को सम्मान से देखता है'

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बुधवार (1 अप्रैल) को फुल्का बीजेपी में शामिल हुए. पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने उनके इस कदम का स्वागत किया. उन्होंने कहा, "सिख धर्म के लिए न्याय की लड़ाई निडर होकर लड़ने वाले एडवोकेट एचएस फुल्का, जिन्हें सिख समाज का हर व्यक्ति सम्मान की दृष्टि से देखता है, आज भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं."

बता दें कि एचएस फुल्का एक जाने-माने वकील हैं, जिन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के लिए न्याय की लंबी लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने कोर्ट में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया. यही कारण है कि पंजाब और सिख समुदाय में उनका गहरा सम्मान है. पहले वो 2014 में आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, लेकिन  2018 में उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली. अब वह बीजेपी में शामिल हो गए हैं और इसे एक बड़े राजनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है.