Punjab: बठिंडा में बड़ा बवाल! पुलिस की मौजूदगी में हुई गोलीबारी में अकाली नेता की मौत... जानिए पूरा मामला
Punjab: पंजाब के बठिंडा के गुरुसर सैणेवाला में पुलिस मौजूदगी के दौरान गोलीबारी में घायल अकाली नेता निर्मल सिंह टीटू ने 17 दिन इलाज के बाद दम तोड़ दिया, जिससे पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे.

Punjab Akali Leader Death News: पंजाब में वारदातों का सिलसिला लगातार जारी है, यहां आए दिन गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं. इस बीच बठिंडा के गांव गुरुसर सैणेवाला से एक और बड़ी वारदात सामने आई है, जहां पुलिस की मौजूदगी के दौरान हुई गोलीबारी ने आखिर एक और जान ले ली.
अकाली नेता निर्मल सिंह उर्फ टीटू ने 17 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद शनिवार को निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया. टीटू की मौत के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है, जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, निर्मल सिंह टीटू का अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. 30 अप्रैल को फरीदकोट जिले के कोटकपूरा से कुछ पुलिसकर्मी और सादे कपड़ों में लोग गांव पहुंचे थे. उस वक्त टीटू अपने खेत में ट्रैक्टर चला रहे थे.
इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस बढ़ी और तकरार ने हिंसक रूप धारण कर लिया. देखते ही देखते अचानक गोलियां चलने लगी, जिसमें एक गोली टीटू के पेट में लग गई. गंभीर हालत में उन्हें बठिंडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
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पुलिस की मौजूदगी पर उठे सवाल
इस दौरान मृतक के बेटे आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश थी. गोपी का कहना है कि एक इंस्पेक्टर और कुछ प्रभावशाली लोगों ने राजनीतिक दबाव के तहत उनके पिता के खिलाफ कोटकपूरा सिटी थाने में झूठा केस दर्ज करवाया था.
उन्होंने कहा कि घटना के समय कई हथियारबंद लोग और पुलिस टीम मौके पर मौजूद थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. गोपी के मुताबिक हालात बिगड़ते देख उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल की गई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली.
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
टीटू की मौत के बाद संगत मंडी पुलिस ने मुल्जिमों के खिलाफ कत्ल की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. हालांकि गांव और सियासी हलकों में यह चर्चा तेज है, उनका कहना है कि अगर मौके पर मौजूद पुलिस समय पर दखल देती तो शायद टीटू की जान बच सकती थी.
























