Punjab and Haryana High Court News: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. पेंशन से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक सेवा करने से किसी अधिकारी को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता. पेंशन कोई इनाम नहीं है, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा नियमों के तहत प्रदान किया जाने वाला कानूनी लाभ है.

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह टिप्पणी एक सेवानिवृत्त फौजी अधिकारी के सिविलियन क्षेत्र में उसकी पुन: नौकरी के आधार पर पेंशन की मांग करने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की. याचिकाकर्ता को पंजाब बिजली नियामक आयोग में एक अस्थायी पद पर नियुक्त किया गया था लेकिन उन्हें पेंशन लाभ नहीं दिए गए थे.

अदालत ने याचिका ठुकराई

अदालत ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) अशोक की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी नियुक्ति ऐसी नहीं थी कि वह कानूनी तौर पर पेंशन ले सकें. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन का अधिकार तभी पैदा होता है जब सेवा की शर्तें और नियम इसकी इजाजत देते हैं.

स्थायी पद के कोई रिकॉर्ड नहीं- हाई कोर्ट

रिकॉर्डों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने यह कहा कि याचिकाकर्ता की 2002 में नियुक्ति पुन: नियुक्ति के आधार पर की गई थी और नियुक्ति पत्र में इस पद को पूरी तरह से अस्थायी बताया गया था, जो किसी भी समय समाप्त हो सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आयोग के अंदर कभी भी कोई स्थायी या पेंशन योग्य पद बनाया गया था.

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