पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान की घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर करीब 560 दिनों तक 400 फुट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर बैठे कार्यकर्ता गुरजीत सिंह खालसा को शुक्रवार (24 अप्रैल) सुबह आखिरकार नीचे उतार लिया गया. अधिकारियों ने बताया कि इस घटनाक्रम के साथ ही उस नाटकीय विरोध प्रदर्शन का अंत हो गया.

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12 अक्टूबर, 2024 को पटियाला के पास समाना में गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के लिए कड़ी सजा की मांग करते हुए खालसा द्वारा टावर पर चढ़कर अपना विरोध जताया गया था. पटियाला के एक अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि दमकलकर्मियों, पुलिस और नागरिक अधिकारियों की एक टीम ने विशेष क्रेन लिफ्ट की मदद से उन्हें नीचे उतारा. 

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टावर से उतारने के अस्पताल ले जाया गया

'सिख जयकारा' और 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के नारों के बीच नीचे उतरने के बाद, खालसा को चिकित्सा जांच के लिए एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके समर्थकों ने उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं. पटियाला जिले के खेरी नागियां गांव के कार्यकर्ता ने जमीन पर कदम रखते हुए कहा कि हमने जीत हासिल कर ली है. 

गुरजीत सिंह खालसा ने कहा कि गुरु की कृपा से मैं 18 महीने और 12 दिन बाद सुरक्षित नीचे आ गया हूं. मैं पंजाब सरकार का आभारी हूं. खालसा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां का धर्म-अपवित्रता विरोधी कानून लागू करने के लिए आभार व्यक्त किया. खालसा ने उन्हें सुरक्षित नीचे लाने के लिए स्थानीय प्रशासन का भी धन्यवाद किया. 

पंजाब सरकार ने लागू किया सख्त कानून

कार्यकर्ता ने पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में धर्म-अपवित्रता विरोधी कानून- जागृत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 अधिसूचित किए जाने के बाद अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया. इसमें गुरु ग्रंथ साहिब के किसी भी अपमान के लिए आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित कठोर दंड का प्रावधान है. 

यह विरोध प्रदर्शन अपनी अनूठी प्रकृति और खालसा द्वारा सहन की गई अत्यधिक कठिन परिस्थितियों के कारण पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बन गया, जो कड़ाके की सर्दी और भीषण गर्मी के महीनों में भी टावर के ऊपर रहे. उन्हें रस्सियों के माध्यम से आवश्यक सामग्री भेजी गई. वे टावर के ऊपर एक अस्थायी तिरपाल आश्रय में रहे और शौच के लिए पॉलिथीन बैग का इस्तेमाल करते थे.

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