कांग्रेस ने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को अहम जिम्मेदारी दी है. कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब में मौजूदा राजनीतिक हालात का जायज़ा लेने और उस पर रिपोर्ट सौंपने के लिए तत्काल प्रभाव से AICC ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए हैं. इसमें मीनाक्षी नटराजन, अजय माकन और भजन लाल जाटव के नाम शामिल हैं. मीनाक्षी का नामांकन रद्द कर दिया गया. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (12 जून) को सुनवाई होगी.
कांग्रेस के समर्थकों ने सीजेआई को लिखी चिट्ठी
नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के लगभग 300 समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने गुरुवार (11 जून) को सीजेआई सूर्यकांत और सीईसी ज्ञानेश कुमार को एक खुला पत्र लिखकर मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने पर चिंता व्यक्त की. इस पत्र में कहा गया कि नटराजन का नामांकन खारिज किया जाना केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि यह चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े व्यापक सवालों से जुड़ा विषय भी है.
कांग्रेस प्रवक्ता अवनी बंसल ने यह पत्र सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया. प्रधान न्यायाधीश और निर्वाचन आयोग को संबोधित पत्र में कहा गया है कि किसी नामांकन को खारिज करने के अधिकार का इस्तेमाल ‘‘अत्यंत संयम, पूर्ण पारदर्शिता और कानून के प्रति अटूट निष्ठा’’ के साथ किया जाना चाहिए.
जानकारी छिपाने के चलते रद्द हुआ नामांकन
पत्र पर जिन लोगों के साइन हैं उनका कहना है कि उपलब्ध तथ्यों से यह सवाल उठता है कि क्या जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और निर्वाचन आयोग के नामांकन पत्रों की जांच संबंधी दिशा-निर्देशों में निर्धारित वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन नटराजन को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किए जाने से पहले किया गया था. पत्र में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36 का हवाला देते हुए कहा गया है कि नामांकन पत्र को ऐसे आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, जिनका स्वरूप महत्वपूर्ण न हो. राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप में खारिज कर दिया गया था.
MP में BJP उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने पर दिग्विजय सिंह की पहली प्रतिक्रिया, 'ये हमारी...'
