पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. राज्य में बुधवार (1 अप्रैल) से ड्रग और सामाजिक आर्थिक जनगणना शुरू की गई है, जिससे नशे की रोकथाम के लिए नीतियां बनाने के लिए जरूरी डेटा इकट्ठा किया जाएगा.

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इस डेटा के जरइए नशे पर नकेल कसी जाएगी. इसके लिए लगभग 28 हजार कर्मचारी राज्य के लगभग 65 लाख परिवारों में ये जनगणना तीन महीने में पूरी करेंगे. घर-घर जाकर कर्मचारियों द्वारा परिजनों, पीड़ितों और सम्मानित लोगों से जानकारी जुटाई जाएगी.

11 गांव में पायलट प्रोजेक्ट के तहत हो चुकी है जनगणना

जनगणना से पहले 11 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ये जनगणना पहले की गई है ताकि ये पता लगाया जा सके कि क्या लोग नशे से संबंधित जानकारी सरकार को देने के लिए तैयार हैं. पायलट प्रोजेक्ट में ये सामने आया है कि लोग नशे के बारे में जानकारी दे रहे हैं ताकि वे इससे छुटकारा पा सकें. 

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ये जनगणना पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराई जाएगी. इससे पता लगाया जाएगा कि पंजाब के अंदर कितने लोग नशे के आदि हैं. साथ ही राज्य में नशे की तस्करी किस तरह की जा रही है. पिछले दिनों किए गए सर्वे से सरकार को काफी हद तक सफलता प्राप्त हुई थी. इसके लिए सरकार की तरफ से करीब 150 करोड़ का बजट उपबंध कर दिया गया है.

जनगणना के शुरू होन पर क्या बोले सीएम मान?

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज कहा कहा कि आज से ये जनगणना शुरू हुई है और पंजाब में और इसका मकसद राज्य में नशे की समस्या के बारे में पूरी जानकारी इक्ट्ठा करना है. इसमें नशा करने वालों की आर्थिक सामाजिक स्थिति का पता लगाना और उसके आधार पर नशे के विरुद्ध नीतियां बनाना  मकसद है. 

इसके जरिए ये भी पता लगाया जाएगा कि कौन सा नशा कोई व्यक्ति इस्तेमाल कर रहा है और उसकी उम्र, आर्थिक सामाजिक स्थिति और शिक्षा के बारे में पता किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना से संबंधित सारी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी. 

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