पंजाब में लगता है कांग्रेस के अंदर गुटबाजी खत्म होने की बजाय बढ़ती जा रही है. पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बीच का टकराव अब उनके बयानों में भी झलकने लगा है. आज मीडिया से बातचीत के दौरान चन्नी वडिंग से जुड़े सवालों से बचते नजर आये हैं.

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उन्होंने सीधा कहा कि जो बात होनी थी हो गई, जितना बोलना था बोल दिया. इसके बाद वो अपने वाहन से निकल गए. इससे पहले वडिंग ने भी इशारों-इशारों में कहा था कि जब सरकार बनने जा रही है तो थोड़ा टकराव होता है. 

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वडिंग के साथ मतभेद पर क्या बोले चन्नी

दअसल, चन्नी से पंजाब से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सवाल किये गए थे. पंजाब कांग्रेस में चल रहे घमासान और वडिंग के साथ चल रहे टकरावों को लेकर भी चन्नी से सवाल किया गया था. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या पंजाब में एकता आ गई है और आपके समर्थक जिस तरह से वडिंग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं, उसपर आप क्या कहेंगे. इसपर चन्नी ने कहा, "खबर हो चुकी है आपके लिए. जितना बोलना था बोल दिया." गौर हो कि चन्नी और वडिंग के समर्थकों के बीच पटियाला, संगरूर और बठिंडा जैसे कार्यक्रमों में खुलकर गुटबाजी देखने को मिली थी. 

'परिसीमन से पंजाब को नुकसान'

इसके अलावा जब परिसीमन को लेकर सवाल किया गया तो चन्नी ने कहा, "बीजेपी डिलिमिटेशन में पंजाब के हितों को खा जाएगी. मैं सुखबीर सिंह बादल को एक सलाह देना चाहता हूं कि परिसीमन में पंजाब के हितों को बिल्कुल खा लिया जाएगा. उसमें पंजाब का सबसे बड़ा नुकसान है. आपने पहले खेती बिलों पर पंजाब के साथ धोखा किया अब दोबारा मत करना."

कहीं गुटबाजी कांग्रेस पर न पड़े भारी

बता दें कि इससे पहले वडिंग ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि पार्टी में घमासान वहीं होता है, जहां समान होता है. हम पंजाब में चुनाव जीतने जा रहे हैं इसलिए मारामारी है. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि चन्नी से कोई गिले शिकवे नहीं है, वो हमारे मुख्यमंत्री थे. बड़ा भाई तो नहीं मानता हूं.

इन दोनों के बयानों से साफ है कि चन्नी और वडिंग के बीच भूपेश बघेल के दखल के बाद भी गुटबाजी जारी है. अगर ऐसा ही बना रहा तो पंजाब के आगामी चुनावों में कांग्रेस की रणनीतियों को बड़ा झटका लग सकता है. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान कैसे इस गुटबाजी को खत्म करेगी. 

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