चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है. दोनों दलों के नेताओं की सोशल मीडिया पर हुई बयानबाजी ने गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 29 जनवरी को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से पहले माहौल काफी गरमा गया है.

सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद

चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी के प्रभारी जरनैल सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की. इसके साथ उन्होंने लिखा कि एक तरफ कट्टर विरोधी होने का दावा और दूसरी तरफ सत्ता में पार्टनरशिप चल रही है.

उनका कहना था कि चंडीगढ़ में बीजेपी का मेयर और कांग्रेस का सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर होना, बीजेपी-कांग्रेस की मजबूत सांठगांठ का सबूत है. साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह “नूरा कुश्ती” अब देश समझ चुका है.

कांग्रेस ने दिया करारा जवाब

इस बयान पर चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह लक्की ने पलटवार किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब 2024 में मेयर आम आदमी पार्टी का बना था और सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर बीजेपी के बने थे, तब आम आदमी पार्टी कौन सा खेल खेल रही थी. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आरोप लगाने से पहले आम आदमी पार्टी को अपने पिछले रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए.

चंडीगढ़ में 2023–24 के चुनावों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था. उस समय मेयर आम आदमी पार्टी का चुना गया, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर बीजेपी के बने थे.

तब आरोप लगे थे कि आम आदमी पार्टी के कुछ पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की थी. वहीं 2024–25 के चुनाव में बीजेपी का मेयर बना और कांग्रेस के खाते में सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर की कुर्सी गई.

अब 29 जनवरी से पहले जिस तरह दोनों दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं, उससे चंडीगढ़ नगर निगम का गठबंधन खतरे में दिख रहा है. सवाल यह है कि क्या चुनाव तक दोनों दल एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठा पाएंगे या यह बयानबाजी गठबंधन को पूरी तरह तोड़ देगी. चंडीगढ़ की राजनीति में आने वाले दिन काफी अहम माने जा रहे हैं.