चंडीगढ़ को लेकर केंद्र के प्रस्तावित संविधान संशोधन बिल ने पंजाब की सियासत में भूचाल ला दिया है. शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. पंजाब के दल इसे अपने अधिकारों पर सीधा हमला मान रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे महज प्रशासनिक सुधार बताकर विरोधियों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है.
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन बिल केवल चंडीगढ़ में नई व्यवस्थाओं के लिए सुविधाजनक बदलाव के तौर पर लाया जा रहा है. उन्होंने साफ कहा, “चंडीगढ़ की व्यवस्थाओं या प्रशासनिक स्तर पर कोई भी बदलाव संसद के जरिए होता रहा है, जिसमें समय लगता है. लेकिन नए संशोधन में राष्ट्रपति की सहमति पर कोई बदलाव करने की व्यवस्था होगी. इससे अलग कोई और विषय नहीं है.” आरपी सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “विपक्ष के लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए विरोध कर रहे हैं.”
बीजेपी की पंजाब इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी ‘एक्स’ पर लिखा कि उनके लिए पंजाब सबसे पहले है. उन्होंने कहा- “चंडीगढ़ पंजाब का एक अहम हिस्सा है और बीजेपी पंजाब के हितों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है. चंडीगढ़ को लेकर जो भी भ्रम की स्थिति है, सरकार से बात करके दूर कर दी जाएगी. एक पंजाबी होने के नाते भरोसा दिलाता हूं कि हमारे लिए पंजाब सबसे पहले है.”
'चंडीगढ़ पर सिर्फ पंजाब का हक'
संशोधन बिल पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया पंजाब के सियासी दलों की तरफ से सामने आई है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल तीनों ने इसे पंजाब विरोधी बताया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बिल का कड़ा विरोध किया. “एक्स” पर उन्होंने लिखा, “यह संशोधन पंजाब के हितों के विरुद्ध है. हम केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के विरुद्ध रची जा रही साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे. हमारे पंजाब के गांवों को उजाड़कर बने चंडीगढ़ पर सिर्फ पंजाब का हक है.”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया, “बीजेपी सरकार संविधान (131वां संशोधन) बिल ला रही है. वह असल में चंडीगढ़ पर कब्जा करने की कोशिश है. जब से बीजेपी सत्ता में आई है, पंजाब ने पिछले 5-7 चुनावों में पीएम मोदी और बीजेपी की सोच के खिलाफ वोट दिया है. अब यह चंडीगढ़ पर कब्जा करने की उनकी आखिरी कोशिश है.”
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी बिल का विरोध करते हुए इसे संघीय ढांचे पर हमला बताया. उन्होंने बताया, “पंजाब विरोधी बिल और फेडरल स्ट्रक्चर पर खुलेआम हमले का अकाली दल हर मोर्चे पर मुकाबला करेगा और केंद्र की इस चाल को कामयाब नहीं होने देगा.” अकाली दल ने इस मुद्दे पर सोमवार दोपहर दो बजे कोर कमेटी की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है.
“बिल से स्थिति साफ हो जाएगी”
चंडीगढ़ को लेकर हरियाणा में भी चर्चा तेज है. राष्ट्रीय लोक दल के नेता मलूक नागर ने कहा, “यह राज्य और देश दोनों के हित में है. चंडीगढ़ हरियाणा की राजधानी है या पंजाब की, या फिर यह एक केंद्र शासित प्रदेश है. इसको लेकर काफी भ्रम है. चंडीगढ़ में एक स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति के बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा.”
बीजेपी चंडीगढ़ छीनना चाहती है-मंत्री हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “बीजेपी चंडीगढ़ को छीनना चाहती है. वे चंडीगढ़ पर कब्जा करना चाहते हैं. चंडीगढ़ पंजाब का है और पंजाब का ही रहेगा. आम आदमी पार्टी और हमारी सरकार इस लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ेंगे. हम किसी को इसे छूने नहीं देंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “चंडीगढ़ पंजाब के गाँवों को उजाड़कर बनाया गया था. इसे पंजाब के लोगों को बेघर करके बसाया गया था. कानून में साफ लिखा है कि हरियाणा अपनी राजधानी बनाएगा और चंडीगढ़ पंजाब का रहेगा. आज पंजाब को देने के बजाय बीजेपी इसे हड़पना चाहती है. हम इस लड़ाई को पूरी ताकत से लड़ेंगे और बीजेपी को करारा जवाब देंगे.”