महाराष्ट्र शिवसेना यूबीटी में चल रहे घमासान के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है. पार्टी से बागी सांसदों को चीफ सेक्रेटरी अनिल देसाई ने व्हिप जारी होने के बाद भी बैठक में शामिल न होने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इसके लिए सभी सांसदों को 24 घंटे का समय दिया गया है.

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आदेश में कहा गया है कि पार्टी व्हिप मिलने के बावजूद मंगलवार (18 जून) को हुई लोकसभा सांसदों की बैठक में मौजूद न रहने के लिए 'कारण बताओ' नोटिस दिया जा रहा है. नोटिस में लिखा गया कि जरूरी मीटिंग का बताने के बावजूद आप इस बैठक से गायब थे.

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नोटिस में सांसदों से क्या कहा? 

सांसदों को जारी नोटिस में चीफ सेक्रेटरी अनिल देसाई ने कहा, "आपने अपनी पार्टी के संसदीय गुट के नेता और सांसद अरविंद सावंत या चीफ सेक्रेटरी के तौर पर मुझे अपने गायब रहने की कोई वजह नहीं बताई है. पार्टी ने इस मीटिंग में आपके गायब होने को गंभीरता से लिया है. यह पार्टी के आदेश का भी उल्लंघन है.

अनिल देसाई ने आगे कहा, "इसलिए, पार्टी के चीफ सेक्रेटरी के तौर पर, मैं यह 'शो कॉज' नोटिस जारी कर रहा हूं और आपको यह लेटर मिलने के चौबीस घंटे के अंदर इस पार्टी-विरोधी गतिविधियों के बारे में सफाई देने का निर्देश दे रहा हूं.

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नोटिस में सांसदों को दी गई चेतावनी

इसके अलावा अगर इस समय के अंदर आपकी तरफ से कोई सही जवाब या सफाई नहीं मिलती है, तो मैं मान लूंगा कि आपने अपनी मर्ज़ी से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने आगे कहा, "यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत के संविधान के दसवें शेड्यूल के तहत आप अपने कामों के नतीजों के लिए खुद जिम्मेदार होंगे.

शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सदस्यों की बगावत के बीच, उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार (19 जून) को भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका संकल्प नहीं डगमगाया है, लेकिन अगर पार्टी को उन पर भरोसा और विश्वास नहीं है, तो वह इसके अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हैं.

चार साल में दूसरी बार अपनी पार्टी में आसन्न टूट पर, ठाकरे ने कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए वह शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष पद से हटने को तैयार हैं. 

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