महाराष्ट्र के प्रमुख विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में टूट की अटकलों ने तूल पकड़ लिया है. चर्चाएं हैं कि उद्धव गुट के कई सांसद पार्टी छोड़ एकनाथ शिंदे की टीम में जा सकते हैं. इस बीच डैमेज कंट्रोल करने के लिए उद्धव ठाकरे ने रविवार (14 जून) को अपने 9 सांसदों की बैठक बुलाई थी. इस बैठक में ठाकरे ने अपना रुख साफ कर दिया है. 

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उद्धव ठाकरे ने पार्टी में टूट-फूट पर चुप्पी तोड़ी और दो टूक कह दिया, "अगर जाना है तो खुशी-खुशी जाएं." उद्धव ठाकरे ने बैठक में कहा, "आज का दिन शायद मेरा न हो, लेकिन कल निश्चित रूप से मेरा होगा. तब तक हमें धैर्य रखना होगा और यह सब सहना होगा."

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'जब पछतावा होगा, तब तक देर हो चुकी होगी'

उद्धव ठाकरे का कहना है कि जो लोग बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़कर गए हैं, उन्हें एक दिन इसका पछतावा होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. उन्होंने आगे कहा, "चार साल पहले पार्टी में बड़ी टूट हुई थी, जब 40 विधायक अलग हो गए थे. उस समय मैं राज्य का मुख्यमंत्री था. क्या लोगों को सच में लगा कि जो बात सबको दिखाई दे रही थी, उसका मुझे अंदाजा नहीं था?"

'जाने का मन बना लिया है तो दबाव बनाने का क्या मतलब?'

ठाकरे ने कहा, "मुझे इस बारे में आभास था कि क्या चल रहा है लेकिन मैंने किसी से कुछ नहीं कहा. किसी पर दबाव नहीं डाला और न ही उनके कथित घोटालों की फाइलें खुलवाईं. अगर किसी का जाने का मन पहले से ही बन चुका है, तो उसे जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब है? अगर किसी को जाना है, तो वह जाने के लिए स्वतंत्र है. मैं तो उसे शुभकामनाएं ही दूंगा.”

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