शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार की शनिवार (27 सितंबर) को आलोचना की. उद्धव ने कहा कि जिस व्यक्ति ने हमारी सेना के लिए सौर टेंट तकनीक विकसित की, उसे राष्ट्र-विरोधी करार दिया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलने की अनुमति दी जा रही है.
मुंबई में मीडिया से मुखातिब उद्धव ठाकरे ने 'देशभक्तों' से रविवार को एशिया कप के फाइनल मुकाबले का बहिष्कार करने की भी अपील की, जिसमें भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीम आमने-सामने होंगी. उन्होंने कंपनियों से भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान अपने उत्पादों के विज्ञापन न दिखाने का भी आग्रह किया.
वांगचुक को हिरासत में लेने पर उद्धव का केंद्र पर हमला
वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है. सोनम वांगचुक ने दुर्गम इलाकों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए सौर टेंट तकनीक विकसित की. जो हमारी सेना के लिए काम कर रहा है, उसे राष्ट्र-विरोधी करार दिया गया है और एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया है, जबकि आप पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेल रहे हैं, जो भारत में आतंक फैलाता है. यह किस तरह की देशभक्ति है?”
वांगचुक लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की कर रहे हैं मांग
‘लेह एपेक्स बॉडी’ (एलएबी) और ‘करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (केडीए) से जुड़े वांगचुक लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और लेह तथा करगिल के निवासियों के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर पांच साल से जारी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. लेह और करगिल केंद्र-शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा हैं.
केंद्र सरकार ने 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र-शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया था. विपक्षी दल भारतीय क्रिकेट टीम को एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के खिलाफ खेल गतिविधि में शामिल होने का फैसला गलत है.
26 सितंबर को वांगचुक को हिरासत में लिया गया
बता दें कि सोनम वांगचुक को शुक्रवार (26 सितंबर) को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था और उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है. यह कदम केंद्र-शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर क्षेत्र में जारी प्रदर्शन के दो दिन पहले हिंसक रूप अख्तियार करने के बाद उठाया गया था. हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और 90 अन्य घायल हो गए.
