ठाणे: कल्याण का ऐतिहासिक दुर्गाडी किला और 40 वर्षों से सुलगता विवाद... एक बार फिर बकरीद पर तनाव
Eid Al Adha 2026: साल 1986 में आनंद दिघे द्वारा शुरू की गई घंटानाद की यह परंपरा आज भी कायम है. आज एक बार फिर यहां नमाज के दौरान तनाव देखने को मिला. यहां सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया.

हर साल बकरीद आते ही दुर्गाडी किले पर अलग ही माहौल देखने को मिलता है. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ईद पर हिंदू श्रद्धालुओं के मंदिर में जाने पर प्रतिबंध लगाया जाता है. इसी के विरोध में पिछले चार दशकों से एक परंपरा आज भी उतनी ही मजबूती से जारी है- घंटानाद आंदोलन.
साल 1986 में आनंद दिघे द्वारा शुरू की गई घंटानाद की यह परंपरा आज भी कायम है. इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अदालत में याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर सुनवाई अब भी जारी है. आज एक बार फिर यहां नमाज के दौरान तनाव देखने को मिला. नमाज के बाद मुस्लिम समाज ने नारेबाजी की. दूसरी तरफ हिंदू समाज के लोगों ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया.
भारी पुलिस पर तैनात, दुर्गाडी के तीनों रास्तों पर बैरिकेड
तनाव की आशंका को देखते हुए दुर्गाडी क्षेत्र में भार पुलिस बल तैनात किया गया है. बीजेपी, शिवसेना (ठाकरे गुट) और विभिन्न हिंदुत्व संगठनों द्वारा प्रशासन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से घोषित किए गए प्रदर्शन के बाद से इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है. कल्याण के लाल चौकी क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस ने दुर्गाडी की ओर जाने वाले तीनों रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके.
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दुर्गाडी किला विवाद और आनंद दिघे से संबंध
मुंबई के पास कल्याण में दुर्गाडी किला, जहां एक मंदिर मौजूद है. यहीं पर एक मस्जिद भी है. बकरीद के दौरान यहां हिंदुओं के मंदिर आने पर रोक लगा दी जाती थी. इस पर एकनाथ शिंदे के गुरु माने जाने वाले शिवसेना नेता आनंद दिखे ने विरोध किया था. उन्होंने इसके खिलाफ एक आंदोलन छेड़ा था.
साल 1986 में आनंद दिघे ने दुर्गाडी किले में मौजूद मंदिर से घंटानाद आंदोलन की शुरुआत की. यह दावा किया कि यह हिंदुओं का मंदिर है और इस स्थान पर हिंदुओं का हक है. यहां हिंदुओं को आने से कोई रोक नहीं सकता. तभी से यह कल्याण का यह किला महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बन गया. इसके बाद से शिवसेना वहां पर हर साल घंटानाद करती है.
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