मुंबई के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा ठाकरे परिवार की मुलाकातों को लेकर है. महाराष्ट्र की राजनीति में कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पिछले चार महीनों में कुल 9 बार आमने-सामने आए हैं. इन मुलाकातों ने न केवल राजनीतिक पंडितों को चौंकाया है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें भी तेज़ कर दी हैं.
पहली मुलाकात 5 जुलाई 2025 को हुई, जब दोनों भाई मराठी भाषा मेलावा (Marathi Language Conference) में एक ही मंच पर नज़र आए. इसके बाद 27 जुलाई को राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर मातोश्री जाकर उन्हें बधाई दी, जिससे उनके रिश्तों में गर्माहट लौटने के संकेत मिले.
धार्मिक अवसर पर दिखे साथ
इसके बाद 27 अगस्त को उद्धव ठाकरे पूरे परिवार के साथ राज ठाकरे के शिवतीर्थ निवास पहुंचे और गणेश दर्शन किया. यह दो दशकों के बाद हुआ, जब दोनों परिवार एक ही छत के नीचे धार्मिक अवसर पर साथ दिखाई दिए.
10 सितंबर को उद्धव ठाकरे, संजय राउत के साथ दोबारा शिवतीर्थ पहुंचे. वहीं 5 अक्टूबर को संजय राउत के पोते के नामकरण समारोह में ठाकरे परिवार एक बार फिर एक साथ देखा गया. कार्यक्रम के बाद राज ठाकरे मातोश्री भी पहुंचे.
दीपोत्सव कार्यक्रम के उद्घाटन में पूरा ठाकरे परिवार रहे मौजूद
12 अक्टूबर को राज ठाकरे अपने पूरे परिवार के साथ मातोश्री पर स्नेहभोजन (पारिवारिक रात्रिभोज) के लिए पहुंचे. कुछ ही दिनों बाद, 17 अक्टूबर को उद्धव ठाकरे ने मनसे (MNS) के दीपोत्सव कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसमें पूरा ठाकरे परिवार मौजूद रहा.
22 अक्टूबर को उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे की मां के जन्मदिन पर उन्हें बधाई देने शिवतीर्थ पहुंचे. और अब 23 अक्टूबर यानी भाऊबीज (भाई दूज) के अवसर पर ठाकरे परिवार फिर से एक साथ नजर आने वाला है. उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे के घर जाकर त्योहार मनाएंगे. राज ठाकरे अपनी बहन जय जयवंती के साथ भाईदूज मनाएंगे, जबकि आदित्य ठाकरे, राज ठाकरे की बेटी मिताली ठाकरे के साथ यह परंपरा निभाएंगे.
इन लगातार मुलाकातों ने संकेत दिया है कि ठाकरे परिवार में बरसों की दूरियां अब स्नेह में बदल रही हैं और शायद महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रही हैं.