हाल में हुए महानगरपालिका चुनावों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने विपक्ष द्वारा आत्मनिरीक्षण किए जाने की आवश्यकता जोर दिया. उन्होंने मंगलवार (20 जनवरी) को कहा कि महा विकास आघाडी (एमवीए) को साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए था. बारामती से सांसद सुले ने 1992 में कांग्रेस की भारी जीत का हवाला देते हुए कहा कि रिकॉर्ड बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल ही नगर निकाय चुनाव जीतते हैं.
महानगरपालिका चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी
राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 2,869 सीटों में से सबसे अधिक 1,425 सीटें जीतीं, शिवसेना ने 399 और NCP ने 167 सीटें जीतीं. एमवीए में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT), एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और कांग्रेस शामिल हैं.
MVA में कांग्रेस ने जीती सबसे ज्यादा सीटें
एमवीए में कांग्रेस ने सबसे अधिक 324 सीटें जीतीं. शिवसेना (UBT) को 155 सीटें, महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) को 13, NCP (शरदचंद्र पवार) को 36 सीटें मिलीं. सुले ने घटक दलों द्वारा अलग-अलग चुनाव लड़ने का जिक्र करते हुए पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने हमेशा यही कहा है कि महा विकास आघाडी को साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए था. विपक्ष की कमियों को जानने के लिए बूथ स्तर पर गहन आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है.’’
बीएमसी में भी बीजेपी नंबर-1
वहीं, महाराष्ट्र और देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी में भी बीजेपी सभी दलों में अव्वल रही. बीएमसी में अकेले बीजेपी ने 89 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत हासिल की. बीएमसी में उद्धव ठाकरे की पार्टी ने एकनाथ शिंदे की पार्टी से ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया. उद्धव गुट को 65 सीटों पर जीत मिली. उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया था. लेकिन राज ठाकरे की पार्टी दहाई का भी आंकड़ा नहीं छू पाई. राज ठाकरे की MNS को महज 6 सीटों पर जीत मिली. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने MNS से ज्यादा सीटें जीतीं और 8 सीटों पर कब्जा जमाया.