FCRA बिल पर सुप्रिया सुले को बड़ी जिम्मेदारी, JPC में मिली जगह
सुप्रिया सुले को FCRA संशोधन विधेयक 2026 पर बनी संयुक्त संसदीय समिति का सदस्य बनाया गया है. बीजेपी सांसद संजय जायसवाल समिति के अध्यक्ष हैं.

विदेशी चंदे से जुड़े कानून में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार की ओर से लाए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर अब संसद की संयुक्त समिति विचार करेगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार (3 सितंबर) को इस समिति का ऐलान किया. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले को भी इस संयुक्त समिति का सदस्य बनाया गया है.
सुप्रिया सुले ने समिति में अपनी नियुक्ति पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर गठित संयुक्त समिति का सदस्य नियुक्त किए जाने पर मैं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और किरेन रिजिजू का आभार व्यक्त करती हूं. इस समिति की अध्यक्षता डॉ. संजय जायसवाल कर रहे हैं. मैं समिति की चर्चाओं में रचनात्मक रूप से योगदान देने के लिए उत्सुक हूं."
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Grateful to Lok Sabha Speaker Hon. Om Birla (@ombirlakota) ji and Kiren Rijiju (@KirenRijiju) Ji for appointing me as a Member of the Joint Committee on the Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026, chaired by Dr. Sanjay Jaiswal Ji.
— Supriya Sule (@supriya_sule) September 3, 2026
I look forward to contributing…
12 अगस्त को दोनों सदनों में मिली थी मंजूरी
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को आगे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मंजूरी संसद के दोनों सदनों ने 12 अगस्त को दी थी. अब समिति विधेयक के अलग-अलग प्रावधानों पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी.
सरकार इस विधेयक के जरिए विदेशी चंदे से जुड़े मौजूदा कानून में बदलाव करना चाहती है. ऐसे में संयुक्त समिति की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं.
समिति में किस पार्टी के कितने सदस्य?
संयुक्त समिति में बीजेपी के 14 सदस्य और कांग्रेस के 5 सदस्य हैं. इसके अलावा जेडीयू, टीएमसी और डीएमके के दो-दो सांसद समिति में शामिल हैं. एसपी, आईयूएमएल, शिवसेना, एनसीपी (एसपी), एनसीपी और टीडीपी से एक-एक सदस्य को जगह दी गई है.
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सुप्रिया सुले की समिति में मौजूदगी ऐसे समय में हुई है, जब विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में प्रस्तावित बदलाव को लेकर संसद में विस्तार से चर्चा होनी है. अब समिति में होने वाली बैठकों और विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग दलों के सांसद विधेयक के प्रावधानों पर अपनी राय रखेंगे.





















