मुंबई के सिद्धिविनायक की दानपेटी से चोरी और हेरफेर के मुद्दे पर सिद्धिविनायक मंदिर न्यास के अध्यक्ष और शिवसेना के पूर्व विधायक सदा सरवणकर ने सफाई दी है. आरोपों के खिलाफ जवाब उन्होंने प्रेस कांफ्रेस कर दिए हैं.

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विपक्ष के आरोपों और राजनीतिक हमलों का जवाब देते हुए सरवणकर ने सवाल उठाया कि क्या देश के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर की छवि खराब करने के लिए कोई सुनियोजित साजिश रची जा रही है. 

सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ की चोरी, राज ठाकरे का दावा

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सरवणकर ने कहा- मैंने किया ACB से संपर्क

सरवणकर ने हाल में हुई एक सार्वजनिक सभा का उल्लेख भी किया, जिसमें मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मंदिर में कथित गड़बड़ियों से संबंधित एक पत्र पढ़कर सुनाया था. सरवणकर ने स्पष्ट किया कि राज ठाकरे ने अपने भाषण में उनका नाम विशेष रूप से नहीं लिया था. सरवणकर ने कहा कि प्रशासनिक खामियों का पता चलने के बाद उन्होंने स्वयं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से संपर्क किया था. प्रारंभिक जांच, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा और एसीबी द्वारा जाल बिछाए जाने के बाद न्यास के अधिकारी राजन पेंडुलकर को नौ अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया. मौजूदा न्यास प्रशासन ने दान से जुड़ी अनियमितताओं में कथित रूप से शामिल करीब 45 कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन सभी को निलंबित कर दिया है.

शिवसेना (उद्धव गुट) पर लगाए गंभीर आरोप

सरवणकर ने गिरफ्तार अधिकारी राजन पेंडुलकर और अन्य संबंधित कर्मचारियों के शिवसेना (उद्धव गुट) के नेताओं से संबंध होने का सीधा आरोप लगाया. उन्होंने पूर्व महापौर विशाखा राऊत का नाम लेते हुए दावा किया कि इन राजनीतिक संबंधों के ठोस सबूत उनके पास मौजूद हैं. सरवणकर ने दावा किया कि पिछले कार्यकालों के दौरान दान की राशि में हर वर्ष करीब 18 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब से बाहर का अंतर पाया जाता था. उन्होंने इसकी तुलना मौजूदा न्यास मंडल के कामकाज से करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में वित्तीय रिसाव के रास्तों को बंद किया गया और मंदिर की दर्ज आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

अपने इस्तीफे पर क्या बोले सरवणकर?

अपने इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज करते हुए सरवणकर ने सवाल किया कि जब उन्होंने और उनके न्यास मंडल ने इस मामले का खुलासा किया, ACB को शामिल किया तथा गिरफ्तारियों और निलंबन की कार्रवाई कराई, तो उन्हें या उनके मंडल को इस्तीफा क्यों देना चाहिए?

न्यासी राहुल लोंढे ने कहा कि इस पूरे मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जा रही है. साथ ही उन्होंने मामले की अपराध जांच विभाग (CID) से जांच कराने की मांग की.

न्यासी राहुल लोंढे ने वर्ष 2019 में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहने के दौरान और आदेश बांदेकर के न्यास अध्यक्ष के कार्यकाल में मंदिर निधि से ‘शिव भोजन थाली’ योजना के लिए आवंटित 10 करोड़ रुपये की भी जांच कराने की मांग की. उन्होंने इस राशि के वितरण और योजना केंद्रों के उपयोग से संबंधित सटीक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की.

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