महाराष्ट्र की राजनीति में 'राम रक्षा' आंदोलन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने शुक्रवार (17 जुलाई) को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर किया जा रहा आंदोलन इस बात का सबूत है कि उद्धव ठाकरे को भगवान राम और हनुमान की याद सिर्फ आंदोलन के समय ही आती है.
छत्रपति संभाजीनगर में शिरसाट ने कहा, "यह उनका आंदोलन है और इस पर ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है लेकिन इससे यह साबित होता है कि उन्हें (उद्धव ठाकरे को) भगवान राम और हनुमान की याद केवल आंदोलन के समय आती है. उन्होंने हनुमान चालीसा भी पढ़ी है और अब धार्मिक बनने लगे हैं."
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संजय शिरसाट ने कहा कि यह विडंबना है कि उद्धव ठाकरे को 2024 में अयोध्या राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिला था, लेकिन वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. उन्होंने कहा कि अब उसी राम मंदिर के मुद्दे पर आंदोलन किया जा रहा है.
हनुमान चालीसा विवाद का भी किया जिक्र
शिरसाट ने साल 2022 की उस घटना का भी जिक्र किया, जब पूर्व सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी. इसके बाद उन्हें कुछ दिनों के लिए जेल जाना पड़ा था. उन्होंने साफ कहा कि 18 जुलाई को नागपुर में होने वाले शिवसेना (उद्धव गुट) के विरोध प्रदर्शन पर राज्य सरकार कोई रोक नहीं लगाएगी.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नागपुर के प्रदर्शन में बुलाए जाने के सवाल पर शिरसाट ने कहा कि किसी को भी किसी आंदोलन में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. उन्होंने दोहराया कि उद्धव ठाकरे ने खुद राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में जाने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था.
शरद पवार और NDA को लेकर भी दिया बड़ा बयान
संजय शिरसाट ने महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित बदलाव के भी संकेत दिए. उन्होंने कहा, "राजनीति में बदलाव हो रहे हैं. मैंने सुना है कि शरद पवार की राजग के साथ बातचीत हो रही है. वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और सुनील तटकरे भी अलग-अलग बातचीत कर रहे हैं. इन वार्ताओं का नतीजा कुछ दिनों या एक सप्ताह में सामने आ जाएगा."
सोनम वांगचुक के अनशन पर क्या बोले?
शिरसाट ने सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अनशन का 20वां दिन है और अदालत ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है. उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी का मानना है कि इस आंदोलन का कोई सकारात्मक समाधान निकालकर इसे समाप्त किया जाना चाहिए."
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने भी उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे का 'राम रक्षा आंदोलन' उनकी बिखरती पार्टी को बचाने की कोशिश है.
राणा ने व्यंग्य करते हुए उद्धव ठाकरे को 'जनाब' कहा और कहा कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन नहीं किए, लेकिन अब "पार्टी, विधायक और सांसद खोने के बाद उन्हें रामलला, राम रक्षा और हनुमान चालीसा की याद आ रही है."
उन्होंने कहा, "जो आज तक अयोध्या के राम मंदिर नहीं गए, वह 'राम रक्षा' कैसे कर सकते हैं? वह वास्तव में 'पक्ष रक्षा' (अपनी पार्टी को बचाने) का प्रयास कर रहे हैं."
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हनुमान गढ़ी आने का दिया न्योता
नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे से अपील की कि वे 18 जुलाई को नागपुर यात्रा के दौरान अमरावती स्थित हनुमान गढ़ी भी आएं और उनके तथा राणा परिवार के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करें.
उन्होंने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे को अपना 'राम रक्षा' कार्यक्रम शुरू करने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय जाकर उसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा के सामने नमन करना चाहिए.
