बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे एक साथ आ गए हैं. दोनों ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इस गठबंधन पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि यह दोनों भाई थे, इन दोनों को एक साथ आना चाहिए, यह बालासाहेब ठाकरे भी चाहते थे. लेकिन अब दोनों भाई स्वार्थ के लिए साथ आए हैं.

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ठाकरे बंधुओं के गठबंधन पर बोले मंत्री रामदास अठावले

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि बालासाहेब ठाकरे को धक्का देकर राज ठाकरे शिवसेना से बाहर आए थे और उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाई थी. तब बालासाहेब ठाकरे को बहुत दुख हुआ था. उसके बाद बालासाहेब ठाकरे की इच्छा थी कि उद्धव और राज ठाकरे को एक साथ आना चाहिए. तब न उद्धव ठाकरे माने और न ही राज ठाकरे माने.

रामदास अठावले ने कहा कि राजनीति के लिए दोनों भाई एक साथ आए हैं. इसके लिए हमारी दोनों को बधाई है. राजनीति में कौन किसके साथ जाएगा इसके लिए लोकतंत्र में हर किसी को अधिकार है. 

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नगर पालिका चुनाव में मिली जीत का किया जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय निकाय चुनाव में मिली जीत का जिक्र करते हुए कहा कि अभी बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार) और आरपीआई इस चुनाव में कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ लड़े. इसके बावजूद भी सबसे ज्यादा सीटें महायुती को मिली हैं. 

उन्होंने आगे कहा, "उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का नाम भी चुनाव में नहीं था. अभी मुंबई में चुनाव को लेकर दोनों भाई एक साथ आए हैं. लेकिन मुझे लगता है कि मुंबई में 40 फीसदी मराठा वोटर्स हैं और 60 फीसदी नॉन मराठा वोटर्स हैं. मराठा वोटर्स उद्धव और राज ठाकरे के गठबंधन को वोट दे दें, ऐसा बिल्कुल नहीं है. तो महायुती को भी 50 फीसदी मराठा वोट मिल सकता है." 

बीजेपी को हराना इतना आसान नहीं है- अठावले

अठावले ने दावा किया कि मुंबई का मेयर महायुती का होगा. परिवार के एक होने और बीजेपी को हराने वाले सवाल पर कहा, "मुझे लगता है कि बीजेपी को हराना आसान नहीं है. जब तक मैं बीजेपी के साथ हूं. मैं जिसके साथ रहा हूं उसको सत्ता मिली. जब मैं कांग्रेस और एनसीपी के साथ गया तब उन्हें सत्ता मिली. उसके बाद मैं बीजेपी और शिवसेना के साथ आया तब उन्हें सत्ता मिली. महाराष्ट्र की राजनीति में जहां मैं जाता हूं उसको सत्ता मिलती है."