उद्धव गुट की राहुल गांधी को नसीहत, 'RSS को कोसने की बजाय...'
Uddhav Thackeray Faction on Rahul Gandhi: उद्धव ठाकरे गुट ने कहा कि आरएसएस से हमारे पुराने संबंध रहे हैं. हम नहीं कह पाएंगे कि उन्होंने सिस्टम को कैप्चर कर लिया.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम की आत्मा को आरएसएस ने कैप्चर कर लिया. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान कभी शिक्षा मंत्रालय चलाते ही नहीं थे जो संगठन इसे चलाता है, वो आरएसएस है. इस पर उद्धव गुट की प्रतिक्रिया सामने आई है. उद्धव गुट के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि आरएसएस को राजनीति में मत लाइए. वो सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है.
हमारे और आरएसएस के बहुत पुराने रिश्ते- दुबे
आनंद दुबे ने कहा, "हमारे और आरएसएस के बहुत पुराने रिश्ते रहे हैं. फिलहाल हम तो ये नहीं कह पाएंगे कि उन्होंने कैप्चर कर लिया है. इस देश के सिस्टम को सरकारों ने खराब किया है. सरकारों की आलोचना करिए. आज भी हमारे देश में करीब-करीब 94 हजार स्कूल बंद हो गए. क्यों हमारे यहां सरकारी स्कूलों के महत्व को नहीं बढ़ाया जा रहा है. जब बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ेगा तब जाकर वो देश का भविष्य बनेगा."
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RSS को कोसने की बजाय सरकार को कोसिए- दुबे
शिवसेना यूबीटी प्रवक्ता ने ये भी कहा, "RSS को कोसने की बजाय सरकार को कोसिए कि हर राज्य के सरकारी स्कूल बेहतर हो जाएं."
जो उपद्रवी हैं उनकी धड़ पकड़ करिए- दुबे
वहीं छात्रों के आंदोलन और मामले दर्ज होने से जुड़े सवाल पर आनंद दुबे ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि किसी भी बच्चे पर नाजायज एफआईआर नहीं होनी चाहिए. कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे बच्चों को मनोबल गिरे." उन्होंने कहा कि जो उपद्रवी हैं उनकी धड़ पकड़ करिए. अगर कोई दोषी है तो उसे सजा दीजिए लेकिन निर्दोष बच्चे जिन्होंने कभी मच्छर नहीं मारा है, उनको आप पत्थरबाज कहकर मत पकड़िए. चाहें जेपी नड्डा हों या मल्लिकार्जुन खरगे हो, पुलिस वाली रानजीति में नहीं पड़ना चाहिए. पुलिस अपना काम करेगी.
'अभिव्यक्ति की आजादी है बशर्ते भाषा में मर्यादा हो'
एक्स हैंडल को दिल्ली पुलिस के नोटिस पर उन्होंने कहा कि किसी भी सोशल मीडिया पर कुछ कहना हमारी अभिव्यक्ति की आजादी है बशर्ते भाषा में मर्यादा होनी चाहिए. आलोचना से कोई तकलीफ नहीं है लेकिन सरकार हमारी आवाज बंद करेगी तो फिर कोई डर के मारे सरकार की आलोचना ही नहीं करेगा. तब ये लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र होग.





















