पुणे के मोशी इलाके में वेस्ट टू एनर्जी परियोजना की कार्यालय इमारत ढहने के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है. हादसे के बाद इमारत में 23 मजदूर मौजूद थे, जिनमें से 9 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. वहीं, करीब 8-9 लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है, जिन्हें बाहर निकालने का कार्य लगातार जारी है.

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दरअसल, पुणे के मोशी इलाके में वेस्ट टू एनर्जी परियोजना की तीन मंजिला इमारत ढहने के बाद बड़ा हादसा हुआ है. इस बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग, पहली मंजिल पर कैंटीन और दूसरी मंजिल पर कॉन्फ्रेंस रूम था. हादसे के समय इमारत में 23 मजदूर मौजूद थे. जबकि, दूसरी मंजिल पर मौजूद 5 मजदूर हादसे के तुरंत बाद सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे.

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बचाव दल ने 9 मजदूरों को सुरक्षित निकाला

जानकारी के मुताबिक, बचाव अभियान के दौरान शाम 6 बजे और देर रात 3 बजे कुल 9 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. रात करीब 2 बजे रेस्क्यू टीम ने साउंड वाइब्रेशन टेस्ट किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मलबे में फंसे मजदूरों के जीवित होने के कोई संकेत मिल रहे हैं या नहीं. हालांकि, इस परीक्षण में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

8-9 मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका

इसके बाद अगले करीब 6 घंटे तक जेसीबी मशीनों की मदद से इमारत के किनारे जमा मलबा हटाने का काम किया गया. सुबह करीब 8:30 बजे पहली मंजिल की दीवार में छेद कर 9 से 10 बचावकर्मी कैंटीन के अंदर पहुंचे. अब रेस्क्यू टीम पहले कैंटीन और उसके बाद पार्किंग में खड़े वाहनों के बीच फंसे लोगों की तलाश कर रही है. अधिकारियों के अनुसार, अब भी 8 से 9 मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका है और उन्हें निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है.

पिलर के नीचे फंसे कर्मचारी को निकाला गया सुरक्षित

मोशी इमारत हादसे में पिलर के नीचे फंसे एक कर्मचारी को कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. पिंपरी-चिंचवड़ अग्निशमन विभाग, NDRF और भारतीय सेना के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं. बचाव अभियान का हर पल बेहद जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. भारी मलबे और अस्थिर ढांचे के बीच राहत दल पूरी सावधानी के साथ ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं.

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