मुंधवा लैंड डील घोटाले में बड़ा खुलासा, शीतल तेजवानी के 1000 पन्नों के सबमिशन से जांच पर उठे सवाल
Maharashtra News: शीतल तेजवानी ने खड़गे कमेटी को 1,000 पन्नों का सबमिशन देकर मुंधवा लैंड डील जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए. उन्होंने अमाडिया LLP से भुगतान न होने का आरोप लगाया.

पुणे के चर्चित मुंधवा लैंड डील घोटाले में नया मोड़ आ गया है. इस केस की मुख्य आरोपी शीतल तेजवानी द्वारा खड़गे कमेटी को दिया गया विस्तृत सबमिशन ABP न्यूज के हाथ लग गया है. यह वही मामला है जिसमें अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम सामने आया था.
तेजवानी ने यह सबमिशन गुरुवार (4 दिसंबर) को अपने वकील दीपाली केदार के जरिए जमा किया था, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले ही पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
1,000 पन्नों का सबमिशन, जांच पर उठाए सवाल
तेजवानी के इस सबमिशन में 1,000 से ज्यादा पन्ने हैं, जिसमें उन्होंने जांच की जुरिस्डिक्शन, निष्पक्षता और कानूनी आधार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका कहना है कि राजस्व विभाग की कई कार्रवाइयां पहले से ही बॉम्बे हाई कोर्ट की निगरानी में चल रही हैं, ऐसे में वही विभाग इस केस में स्वतंत्र जांच कैसे कर सकता है?
उन्होंने साफ कहा है कि जब खुद राजस्व विभाग न्यायिक समीक्षा के दायरे में है, तो वह अपने ही विवादित फैसलों की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता.
वतनदार परिवार से पुराने विवाद का हवाला
तेजवानी का दावा है कि वतनदार परिवार पिछले कई दशकों से राजस्व विभाग के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. ऐसे में विभाग इस मामले में बिना पक्षपात के जांच नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, खड़गे कमेटी का इस विषय पर निर्णय देना हाई कोर्ट में लंबित मामलों पर समानांतर सुनवाई जैसा होगा, जो न्यायिक व्यवस्था के बिल्कुल खिलाफ है.
जमीन डील पूरी तरह वैध थी- तेजवानी
अपने बचाव में तेजवानी ने जोर देकर कहा है कि यह जमीन सौदा पूरी तरह कानूनी था. उन्होंने दावा किया कि उनके पास वतनदार परिवार द्वारा जारी रजिस्टर्ड और नोटराइज्ड पावर ऑफ अटॉर्नी मौजूद है, जो उन्हें डील से संबंधित अधिकार प्रदान करती है.
सबसे बड़ा आरोप उन्होंने अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP पर लगाया है. तेजवानी का कहना है कि अमाडिया ने इस डील में एक भी रुपया नहीं दिया. उनके अनुसार, भुगतान न होने की स्थिति में सेल डीड वैध नहीं मानी जा सकती और ऐसे में जमीन का स्वामित्व वतनदार परिवार के पास ही रहता है.
2.5 करोड़ का भुगतान करने का दावा
तेजवानी ने यह भी बताया कि PoA और डेवलपमेंट एग्रीमेंट के समय उन्होंने वतनदार परिवार को करीब 2.5 करोड़ रुपये दिए थे. उनका कहना है कि यह भुगतान और दस्तावेजों की नोटराइज्ड स्थिति उनके सद्भाव और पारदर्शिता का प्रमाण है.
सेल डीड रद्द करने के लिए दायर किया सिविल मुकदमा
अमाडिया के कथित नॉन-पेमेंट को आधार बनाते हुए तेजवानी ने स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 की धारा 34 के तहत सिविल सूट दायर किया है. इनमें उन्होंने सेल डीड को शून्य, अवैध और गैर-बाध्यकारी घोषित करने की मांग की है.
गिरफ्तारी पर भी उठे सवाल
तेजवानी की गिरफ्तारी अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि यह कार्रवाई ठीक उसी दिन की गई जब उन्हें खड़गे कमेटी के सामने पेश होना था. EOW इस मामले में अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP और पार्थ पवार की भूमिका की भी जांच कर रही है.
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Source: IOCL
























