पुणे में एक बेटा अपनी मां की मौत का सदमा नहीं सह पाया. मां की मौत के सदमे में कुछ ही घंटे बाद फांसी लगाकर बेटे ने अपनी जान दे दी. इस घटना के बाद मां और बेटे का एक ही साथ अंतिम संस्कार किया गया. बता दें कि अस्पताल में इलाज करा रही अपनी मां की मौत का सदमा बर्दाश्त न कर पाने के कारण एक 25 साल के लड़के ने शनिवार (27 जून) की सुबह घर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी.

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इन बच्चों के नाम मंदा डोडके (उम्र 50) और साहिल गणेश डोडके (उम्र 25, पार्वती दर्शन के रहने वाले) बताया जा रहा है. इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया. मां-बेटे की मौत के बाद परिजनों का कोहराम मचा हुआ है.

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कुछ दिन पहले किराए पर रहने आए थे

डोडके परिवार असल में दांडेकर पूल इलाके का रहने वाला है. वहां झुग्गी पुनर्वास प्रोजेक्ट शुरू होने के कारण, वे कुछ दिन पहले पार्वती दर्शन इलाके में किराए पर रहने आए थे. मंदा डोडके बुजुर्ग मरीजों की देखभाल करती थी. चार बहनों के बाद पैदा हुआ साहिल इकलौता बेटा था. उसका रूटीन सुबह जल्दी उठकर लोगों के घरों में दूध की थैलियां पहुंचाना और लिफ्ट रिपेयर का काम करना था.

गुरुवार सुबह मंदा डोडके को स्ट्रोक आया. साहिल ने उन्हें ससून हॉस्पिटल में भर्ती कराया. हालांकि, उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी. घटना वाले दिन साहिल अपनी मां के लिए चाय लेकर हॉस्पिटल गया था. लेकिन, डॉक्टरों ने कहा कि उसकी मां की मौत हो चुकी है. अपनी मां को न बचा पाने के दुख में वह तुरंत घर पहुंचा और फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. 

मौत का सदमा नहीं सहन कर पाया बेटा

बता दें कि साहिल की मां को लकवे की दौरा पड़ा था, जिसकी वजह से वे अस्पताल में भर्ती हुईं थी. इलाज के दौरान हुई मां की मौत से साहिल को गहरा सदमा लगा. इस दुख को न सहन कर पाने के बाद उसने भी अपनी जिंदगी खत्म कर ली. साहिल का अफसोस था कि वह अपनी मां का नहीं बचा पाया.

इसी दुख से आहत होकर साहिल ने ऐसा कदम उठाया. अस्पताल से आने के बाद साहिल ने कमरे में अपने आप को बंद कर लिया. सुबह में जब परिवार ने कमरे का दरवाजा खटखटाया तो वहां से कोई आवाज नहीं सुनाई थी. जिसके बाद परिजनों ने दरवाजे से झांककर देखा तो साहिल फांसी के फंदे पर लटका हुआ था. दोनों ही मां-बेटों की मौत के बाद उनका एक साथ नम आंखों से परिवार ने अंतिम संस्कार किया. 

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