गणेशोत्सव: पुणे में शराब बैन पर HC की फटकार, 'सिर्फ इसी जिले में...'
महाराष्ट्र के पुणे में गणेशोत्सव के दौरान शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है. इस बीच हाई कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन को इस कार्रवाई पर जमकर फटकार लगाई है.

महाराष्ट्र के पुणे में गणेश उत्सव के दौरान प्रशासन ने शराब को बैन कर दिया. इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई. शुक्रवार (11 सितंबर) को हाई कोर्ट ने सख्ती से पूछा कि सिर्फ इसी जिले में ऐसा क्यों किया गया है. कोर्ट ने कहा कि मुंबई और बाकी दूसरे इलाकों में तो ऐसा कोई बैन नहीं है.
चीफ जस्टिस एम सी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की बेंच ने प्रशासन से कहा कि वे इस पाबंदी को हटाएं या न्यायिक हस्तक्षेप का सामना करें. हाई कोर्ट की बेंच ने कहा कि एक जिले में इस तरह की मनमानी कार्रवाई का आदेश देकर अधिकारी पुणे और वहां के निवासियों को बदनाम कर रहे हैं.
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होटल और शराब ठेकों के मालिकों ने डाली थी याचिका
हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो होटल मालिकों और शराब ठेकों के मालिकों के संगठनों ने दायर की थीं. इन याचिकाओं में पुणे जिलाधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव के दौरान 10 दिन तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई थी.
अदालत ने पूछा, "सिर्फ पुणे में ही ऐसा करने के पीछे क्या तर्क है? हमारे अनुसार, ऐसा करना गलत है. यह पुणे के निवासियों के लिए एक कलंक है. आप क्या प्रदर्शित करना चाह रहे हैं कि शराब पीने के बाद सिर्फ पुणे के लोग ही बुरा बर्ताव करते हैं? आप पूरे राज्य में से सिर्फ एक जिले को निशाना बना रहे हैं."
जिलाधिकारी के वकील से कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने पुणे जिलाधिकारी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह दिन में बाद में बताएं कि क्या आदेश वापस लिया जाएगा, अन्यथा अदालत उपयुक्त आदेश पारित करेगी. पीठ ने कहा कि हालांकि उसका मानना है कि अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अव्यवस्था को रोकने की जरूरत है, लेकिन लाइसेंस धारकों को 10 दिन तक अपना कारोबार करने से रोकने वाला कोई एकतरफा आदेश जारी नहीं किया जा सकता.
अदालत ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि ऐसी रोक से शराब पीने के आदी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. मुख्य न्यायाधीश त्रिपाठी ने चुटकी लेते हुए कहा, "अगर उन्हें 10 दिन तक शराब पीने को नहीं मिली, तो वे अस्पतालों में उमड़ पड़ेंगे."
अधिकारियों से अपने आदेश पर फिर से विचार करने का आग्रह करते हुए पीठ ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति सड़क पर हंगामा करेगा या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा.
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