पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ‘प्रोपेन’ और ‘ब्यूटेन’ जैसे एलपीजी घटकों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के बाद पुणे महानगर पालिका ने यहां गैस आधारित शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है. ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल के हमलों के कारण पश्चिम एशिया से तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में बाधा उत्पन्न हुई है.

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पुणे महानगर पालिका के अनुसार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पांच मार्च को एक आदेश जारी कर निर्देश दिया कि देशभर में उपलब्ध ‘प्रोपेन’ और ‘ब्यूटेन’ को घरेलू एलपीजी आपूर्ति के लिए प्राथमिकता दी जाए.

एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि गैस की कमी को देखते हुए, महानगर पालिका ने पांच मार्च से अगले आदेश तक अपने गैस आधारित शवदाह गृहों को बंद रखने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों से लैस विद्युत आधारित शवदाह गृह और लकड़ी आधारित शवदाह गृह चालू रहेंगे.

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नगर निकाय ने बताया कि यहां वैकुंठ श्मशान में गैस आधारित तीन शवदाहगृह अस्थायी रूप से बंद रहेंगे, जबकि मौजूद पांच विद्युत आधारित शवदाहगृह चालू रहेंगे.

एलपीजी के मुद्दे पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसद मल्लू रवि ने कहा कि सिलेंडरों की कमी अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के असर की सिर्फ शुरुआत है. सरकार को पहले से एहतियाती कदम उठाने चाहिए थे या वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी. सरकार की कार्ययोजना क्या है? कल विदेश मंत्री ने युद्ध को लेकर बयान दिया, लेकिन इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई. संसद की कार्यवाही ठप है और सरकार विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने की अनुमति नहीं दे रही है.

वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि सरकार द्वारा सप्लाई से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय समिति इस समस्या को रोक नहीं पाएगी. यह संकट दिन-ब-दिन बढ़ता जाएगा और एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. महंगाई बुरी तरह बढ़ेगी और सरकार बेबस नजर आएगी. उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थिति से निपटने में पूरी तरह असमर्थ है.