महिला आरक्षण को लेकर बीजेपी विपक्ष पर हमलावर है. बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष की वजह से महिला आरक्षण लागू नहीं हो पाया. वहीं विपक्ष का कहना है कि ये तो 2023 में ही संसद से पास हो चुका है. इस बीच शिवसेना यूबीटी की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीजेपी पर आंकड़ों के जरिए निशाना साधा है और अलग-अलग राज्यों में बीजेपी में महिला विधायकों के प्रतिनिधित्व का आंकड़ा शेयर किया है.

प्रियंका चतुर्वेदी के मुताबिक;

  • गुजरात (2022 चुनाव)- 182 सीटों में से 15 महिलाएं चुनी गईं (करीब 8.20 फीसदी)
  • मध्य प्रदेश (2023 चुनाव)- 230 सीटों में से 27 महिलाएं चुनी गईं (करीब 11.70 फीसदी)
  • छत्तीसगढ़ (2023 चुनाव)- 90 सीटों में से 19 महिलाएं चुनी गईं (करीब 21 फीसदी)
  • यूपी (2022 चुनाव)- 403 सीटों में से 47 महिलाएं विधायक बनीं (करीब 11.60 फीसदी)
  • राजस्थान (2023 चुनाव)- 200 विधानसभा सीटों में से 20 महिलाएं चुनी गईं (करीब 10 फीसदी)
  • असम (2021 चुनाव)- 126 विधानसभा सीटों पर 6 महिलाएं विधायक बनीं (करीब 4.8 फीसदी)
  • महाराष्ट्र (2024 चुनाव)-  288 विधानसभा सीटों में से 21 महिलाएं जीतकर आईं (करीब 7.3 फीसदी)
  • बिहार (2025 चुनाव)- 243 विधानसभा सीटों पर 29 महिलाएं जीतीं (करीब 11.9 फीसदी)
  • ओडिशा (2024 चुनाव)- 147 सीटों में 11 महिलाएं चुनकर आईं (7.5 फीसदी)

इन आंकड़ों को शेयर करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "हां, ये चुनी हुईं महिला सदस्य हैं. लेकिन बीजेपी की महिला उम्मीदवारों को मिलने वाले अवसरों के मामले में यह 33% के आसपास भी नहीं है."

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इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने देने के लिए विपक्ष की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनकी 'पिछड़ी मानसिकता' ने भारत में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के एक ऐतिहासिक क्षण की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. सीएम फडणवीस ने घोषणा की कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन अब राज्य भर की महिलाओं से एक करोड़ हस्ताक्षर एकत्र करने के लिए एक व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करेगा, जिसका उद्देश्य 'जनमत' का निर्माण करना और विपक्ष के महिला विरोधी रुख को उजागर करना है. 

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