पीएम की अपील के बाद अधिकारी और नेता भी करेंगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल! जानें- क्यों शुरू ये चर्चा?
PM Narendra Modi On WFH: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की है कि पेट्रोल डीजल का संयम से इस्तेमाल करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करें. अब इस पर नई बहस छिड़ गई है.

पश्चिम एशिया में जारी जंग के करीब ढाई महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश वासियों से अपील की है कि वह संयम से पेट्रोल डीजल का प्रयोग करें. अब इस पर चर्चा छिड़ गई है कि क्या सरकारी कर्मचारी और नेता भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे?
कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला ने कुछ ऐसी ही मांग की है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर उन्होंने प्रधानमंत्री की अपील का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या नेताओं के लंबे लंबे काफिले भी कम होंगे?
उन्होंने लिखा- अगर प्रधानमंत्री चाहते हैं कि हम तेल- यानी पेट्रोल और डीजल- का इस्तेमाल कम करें और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, तो उन्हें अपने सभी मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उनके मंत्रियों वगैरह से कहना चाहिए कि वे काफिलों का इस्तेमाल न करें. इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि सभी सरकारी अधिकारियों को सिर्फ सार्वजनिक परिवहन का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था?
बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित तरीके से उपयोग करना समय की मांग है. तेलंगाना में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के डिजिटल माध्यम से शिलान्यास और उद्घाटन के मौके पर यहां हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत सौर ऊर्जा के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल हो गया है और पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है.
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मोदी ने कहा कि पहले सरकार शत प्रतिशत एलपीजी कवरेज पर केंद्रित थी और अब इसका ध्यान पाइपलाइन के जरिये गैस की किफायती आपूर्ति पर है, साथ ही साथ संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत दुनियाभर में जारी बड़े ऊर्जा संकट का प्रभावी ढंग से सामना कर रहा है. प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए दोहराया कि आयातित ऊर्जा संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से और केवल आवश्यकता होने पर ही किया जाना चाहिए.
























