'यह सुनकर गहरी निराशा हुई कि...', PM मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी
Priyanka Chaturvedi News: पीएम मोदी ने कहा कि पूरी कोशिशों के बावजूद 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' संसद में पास नहीं हो पाया. इस पर प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार को घेरा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (18 अप्रैल) को राष्ट्र को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष को घेरा. 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' संसद में पास नहीं होने पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया. इस पर अब उद्धव ठाकरे गुट की महिला नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को घेरा.
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ''यह सुनकर गहरी निराशा हुई कि प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को कोई आश्वासन नहीं दिया कि 2023 के सभी दलों द्वारा पारित कानून को जनगणना और परिसीमन से डेली delink किया जाएगा, ताकि इसे में 2029 में ही लागू किया जा सके.'
नारी के लिए सम्मान का दिन था लेकिन विपक्ष ने सपोर्ट नहीं किया- PM
पीएम मोदी ने कहा, ''नारी के लिए सम्मान का दिन था, लेकिन विपक्षी पार्टियों ने सपोर्ट नहीं किया. विपक्ष की महिला सांसद बिल गिरने के बाद तालियां बजा रही थीं. 'नारीशक्ति वंदन अधिनियम' के विरोध की एक बड़ी वजह है- इन परिवारवादी पार्टियों का डर! अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा. ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें.''
Deeply disappointing to hear the PM make no assurance to the women of this country of delinking the 2023 Act from Census and Delimitation so as to make it implementable as passed by all parties in 2029 itself
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 18, 2026
यह सुनकर गहरी निराशा हुई कि प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को कोई…
महिला आरक्षण बिल पास न होने पर प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
विपक्षी दलों ने शुक्रवार (17 अप्रैल) को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खिलाफ मतदान किया था. जिसके बाद यह लोकसभा में पारित नहीं हो सका. शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शुक्रवार को अपनी पार्टी के रुख से अलग हटकर लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न होने पर अफसोस जताया था और इसे उन महिलाओं के लिए दुखद दिन बताया, जो संसद या विधानसभाओं में खुद को देखने की उम्मीद कर रही थीं.
संविधान संशोधन विधेयक के मुताबिक वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के बाद 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीट की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक किए जाने का प्रस्ताव था.
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Source: IOCL

























