पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है. पिछले साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. पहली बरसी पर हमले में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

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पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले कौस्तुभ गणबोटे की पत्नी संगीता गणबोटे ने कहा कि जो हमला हुआ था वह बहुत खतरनाक था. मैं उसको मरते दम तक नहीं भूल पाऊंगी. पति की मौत के बाद मैं हमेशा दुख में ही डूबी रहती हूं. उन्होंने कहा कि उनकी यादों को मैं भुला नहीं पा रही हूं. क्योंकि सुबह से लेकर शाम तक मैं उनसे पूछकर ही खाना बनाती थी.

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पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर क्या कहा?

पहलगाम हमले की जवाब में भारतीय सेना की ओर ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई की गई. इस पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव किया है उससे थोड़ा दुख तो हल्का हुआ है, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि उससे कुछ फर्क पड़ेगा.  

उन्होंने कहा कि आतंकियों ने मेरे पति को मारा उसके जवाब में हम उनको मार रहे हैं. इससे थोड़ी कुछ हल्का हो सकता है. इससे मेरे पति थोड़ी वापस आ सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि उन लोगों को यह संदेश देना चाहिए कि अगर आपका झगड़ा सरकार के साथ है तो सरकार से बात करो.

उन्होंने आगे कहा कि सामान्य लोगों को मारकर कुछ भी नहीं मिलने वाला है. उल्टा हम आपके लोग मारेंगे, आप हमारे लोगों को मारोगे यह ऐसे ही चालू रहेगा. इससे अच्छा यह है कि इसे बंद करो. उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा के अलावा, स्कूलों को यह भी सिखाना चाहिए कि ऐसे हमले की स्थिति में कैसे व्यवहार करना चाहिए.

पहली बरसी पर क्या बोले मृतकों के परिजन

वहीं पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए संतोष जगदाले की पत्नी प्रगति जगदाले ने कहा कि इस घटना को आज एक साल पूरा हो गया है. लेकिन मैं उसी अब तक उसी घटना में हूं. मेरी आंखे खुली हो या बंद हो मेरे सामने मेरे पति का गोलियों से भुना हुआ और खून से लथपथ चेहरा ही मुझे दिखता है. मैं इसी आशा में थी कि मेरे पति शायद बेहोश हो गए हैं. मैं हमेशा उसी पल के इर्द-गिर्द घूमती हूं. मैं नहीं जानती की वहां से कब निकलूंगी.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने हमारी तकलीफ को समझते हुए ऑपरेशन सिंदूर किया. मैं उसके लिए सरकार की आभारी हूं. मेरी सरकार से यही अपील है कि ऐसी घटना किसी के साथ न हो, क्योंकि किसी भी औरत पर उसके सामने पति को मरता हुआ देखना बहुत ही तकलीफदेह है. 

उन्होंने आगे कहा कि उस दौरान पर्याप्त संख्या में सेना के जवान मौजूद नहीं थे. मैं सरकार से इतना कहना चाहती हूं कि सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को सेना में भर्ती होने का मौका दे. साथ ही जो शर्तें सरकार द्वारा लगाई जाती हैं उन्हें थोड़ा कम कर दिया जाए, ताकि सेना में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो. 

'यह एक साल सिर्फ बोलने के लिए पूरा हुआ है'

संतोष जगदाले की बेटी ने कहा कि यह एक साल सिर्फ बोलने के लिए पूरा हुआ है. हमारे लिए तो आज भी वही 22 अप्रैल 2025 चालू है. वह हमारी जिंदगी का काला दिन था, क्योंकि हम लोग बहुत खुश थे. सिर्फ एक घंटे में हमारी जिंदगी पूरी तरह घूम गई. उन्होंने बताया कि एक पच्चीस साल का लड़का आता है और पूछता है कि आप हिंदू हो या मुसलमान. अगर मुसलमान हो तो कलमा पढ़ो. उन्होंने आगे कहा कि हम कौन से घर में जन्म लेते हैं यह हम तय नहीं कर सकते, लेकिन यह जबरदस्ती क्यों है कि आप कलमा पढ़ो या अजान पढ़ो. 

पीड़िता ने आगे बताया कि एक साल में पूरी दुनिया में बहुत बदलाव हुआ लेकिन हमारी जिंदगी में कुछ नहीं हुआ. हम आज भी उसी दुख को साथ लेकर जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस दिन यह आतंक पूरी तरह खत्म हो जाएगा तब हमें असल न्याय मिलेगा.

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