महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक किसान इस समय भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. लगातार गिरते प्याज के दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. एक तरफ भीषण गर्मी की वजह से प्याज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे बाजार में उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने ढुलाई (परिवहन) का खर्च बढ़ा दिया है. ऐसे में किसानों पर 'ज्यादा खर्च और कम आमदनी' की दोहरी मार पड़ रही है.
प्याज की फसल से कमाई कर कर्ज चुकाना अब किसानों के लिए एक सपना लगने लगा है. किसान भारी उम्मीदों के साथ अपनी फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन नीलामी में कौड़ियों के भाव कीमत देखकर खून के आंसू रोने को मजबूर हैं.
उत्पादन लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
सोलापुर कृषि उत्पन्न बाजार समिति में सोमवार को अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज को 10 से 15 रुपये प्रति किलो का भाव मिला, जबकि सामान्य गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत महज 3 से 5 रुपये प्रति किलो तक सिमट गई.
किसानों का कहना है कि मौजूदा दरों पर बीज, खाद और मेहनत की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. यदि जल्द कोई सरकारी राहत नहीं मिली, तो हजारों प्याज उत्पादक किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा.
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602 किलो प्याज के मिले सिर्फ 301 रुपये
इस कृषि संकट की सबसे मार्मिक और हैरान करने वाली तस्वीर बीड जिले से सामने आई है. धारूर तहसील के अरणवाडी गांव के किसान संतोष शिनगारे ने 12 बोरियों में भरकर अपना 602 किलो प्याज सोलापुर मंडी भेजा था. मंडी में उनके प्याज को मात्र 50 पैसे प्रति किलो का भाव मिला, जिससे कुल 301 रुपये की कमाई हुई. इसके उलट, मंडी तक प्याज पहुंचाने (ढुलाई और हमाली) में उन्हें कुल 1383 रुपये खर्च करने पड़े. यानी फसल बेचने के बाद भी किसान संतोष को अपनी जेब से 1082 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
संतोष ने बताया कि प्याज बेचकर मिलने वाले पैसों से उन्हें ट्रैक्टर की किस्त भरनी थी. उनके पास अभी भी करीब 10 टन प्याज पड़ा हुआ है, जिसे बेचने को लेकर अब उनके सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
कर्ज और कम दाम से टूटकर किसान ने दी जान
प्याज की खेती और पैदावार के लिए देश और दुनिया भर में मशहूर नासिक के 'लासलगांव' में भी हालात जुदा नहीं हैं. यहां किसानों को फसल की कीमत से ज्यादा यातायात और ढुलाई के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है. इसी निराशा के बीच नासिक के सटाणा तालुका के राहुड गांव में एक दुखद घटना घटी. बदलते मौसम, बेहद कम दाम और बढ़ते कर्ज के बोझ से परेशान होकर 59 वर्षीय किसान गुलाब केशव निकम ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.
तीन एकड़ खेती पर परिवार का पालन-पोषण करने वाले निकम पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था और बेमौसम बारिश ने उनकी फसल को भारी नुकसान पहुंचाया था. इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है.
किसान संगठनों की मांग
लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए किसान संगठनों ने सरकार की मौजूदा नीतियों पर सवाल उठाए हैं. 'किसान सभा' का कहना है कि सरकार द्वारा 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज खरीदने की घोषणा नाकाफी है. संगठन ने मांग की है कि प्याज उत्पादक किसानों को कम से कम 1500 रुपये प्रति क्विंटल की अनुदान सहायता दी जाए, ताकि वे इस भारी आर्थिक संकट से उबर सकें.
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