'पूरी कमान अजित दादा को देने वाले थे', NCP के विलय को लेकर प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे बड़ा खुलासा
Maharashtra News: शशिकांत शिंदे ने दावा किया कि विलय के बाद पार्टी की पूरी कमान अजित पवार को सौंपने का फैसला तय था। विधायक रोहित पवार ने भी कई दावे किए.

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शरद पवार गुट की ओर से बड़ा दावा सामने आया है. पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने साप्ताहिक में लिखे अपने अध्यक्षीय लेख में कहा है कि विलय के बाद पार्टी का पूरा नेतृत्व अजित पवार को सौंपने का फैसला उनका ही था.
'नेतृत्व अजित दादा को सौंपने का निर्णय हमारा था'
शशिकांत शिंदे ने अपने लेख में साफ शब्दों में लिखा कि अगर विलय होता, तो पार्टी की कमान पूरी तरह से अजित पवार को दी जाती. उन्होंने कहा कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया था, ताकि पार्टी एकजुट होकर आगे बढ़ सके.
शिंदे ने यह भी लिखा कि दादा का सपना अधूरा रह गया, लेकिन अब उसे पूरा करना हम सबकी जिम्मेदारी है. इस बयान के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर विलय को लेकर गंभीर बातचीत पहले से चल रही थी.
अजित पवार के निधन के बाद बदला सियासी समीकरण
उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है. उनके जाने के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वे राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं.
इसी पृष्ठभूमि में दोनों गुटों के बीच फिर से विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि शरद पवार ने सार्वजनिक मंचों पर विलय की बात से दूरी बनाई है, लेकिन अंदरखाने बातचीत के संकेत लगातार मिल रहे हैं.
अजित पवार के निधन के बाद शरद पवार ने 12 फरवरी को दिए बयान में कहा था कि उसी दिन विलय पर फैसला होने वाला था. इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई. इसी मुद्दे पर बोलते हुए सांसद सुप्रिया सुले भी भावुक नजर आई थीं. उनका बयान भी इस बात का इशारा था कि पार्टी के भीतर हालात काफी संवेदनशील रहे हैं.
रोहित पवार का दावा, दूसरे गुट की चुनौती
वहीं विधायक रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि उनके पास विलय से जुड़े सबूत हैं. इसके जवाब में दूसरे गुट के नेताओं, खासकर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे खेमे ने उन्हें खुली चुनौती दी थी.
हालांकि रोहित पवार ने उस समय कहा था कि “दादा के निधन के कारण हम संयम बरत रहे हैं,” और उन्होंने ज्यादा आक्रामक रुख नहीं अपनाया.
अब शशिकांत शिंदे के ताजा बयान के बाद मामला फिर से गरमा गया है. सवाल यह है कि अजित पवार गुट के नेता इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया देंगे. क्या सच में विलय की जमीन पहले से तैयार थी? या यह सिर्फ सियासी बयानबाजी है?
फिलहाल इतना तय है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी और खुलासे देखने को मिल सकते हैं. महाराष्ट्र की राजनीति में यह मामला फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है.
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Source: IOCL


























