मायानगरी मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. शहर में पेड़ गिरने की घटनाओं में भारी इज़ाफा हुआ है. इस बीच, मुंबई की महापौर (मेयर) ऋतु तावड़े ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने बताया कि इस मानसून में अब तक शहर में करीब 1,100 पेड़ गिर चुके हैं और बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में 10 नागरिकों की दुखद मौत हुई है. मेयर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन पूरी सतर्कता से काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.

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मुआवजे का ऐलान और पेड़ों की गूगल मैपिंग

महापौर ने बताया कि बारिश से होने वाली मौतों के लिए अलग-अलग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू हैं:

  • पेड़ गिरने से मौत: जिला प्रशासन और BMC की ओर से 5 लाख रुपये का मुआवजा.
  • नाले में गिरकर मौत: 10 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान.

मेयर के अनुसार, जिन पेड़ों के झुकने या कमजोर होने की आशंका है, उनकी वार्ड स्तर पर गूगल मैपिंग कर सूची तैयार की गई है. वहां चेतावनी के बैनर लगाए गए हैं, ताकि लोग जागरूक रहें. उन्होंने बताया कि मानसून से पहले ही 1 लाख 3 हजार पेड़ों की छंटाई की गई थी.

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'अधिकारियों पर कार्रवाई ही एकमात्र समाधान नहीं'

विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर की आलोचनाओं का करारा जवाब देते हुए ऋतु तावड़े ने उनके बयानों को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया. मेयर ने कहा, "मैं लगातार आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हूं. हर घटना के बाद केवल अधिकारियों पर कार्रवाई करना ही समाधान नहीं है. जरूरत उनसे प्रभावी ढंग से काम लेने की है. हमारे अधिकारी देर रात तक मैदान में रहकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं."

नागरिकों से मेयर की सख्त अपील

महापौर ने मुंबईकरों से सीधा संवाद करते हुए कई अहम हिदायतें दीं:

  • समुद्र तटों से रहें दूर: भारी बारिश और हाई टाइड के दौरान समुद्र किनारे जाने से बचें. मनोरंजन के लिए वहां जाना जानलेवा हो सकता है. न्यायालय ने भी नागरिकों से सतर्क रहने की अपेक्षा की है.
  • नालों में न फेंकें कचरा: मेयर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोग नालों में रिक्शा, बाइक और अन्य सामान फेंक देते हैं, जिससे जल निकासी (Drainage) प्रभावित होती है. मुंबई को स्वच्छ रखना केवल BMC की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी समान जिम्मेदारी है.

वृक्ष संजीवनी अभियान और पानी का संकट नहीं

पेड़ों के संरक्षण पर बात करते हुए मेयर ने बताया कि 'वृक्ष संजीवनी अभियान' के तहत अब तक पेड़ों में ठोकी गई करीब 50 किलो कीलें निकाली जा चुकी हैं. अत्यधिक कंक्रीटीकरण से जड़ों को हो रहे नुकसान के लिए उन्होंने साइट इंजीनियरों और ठेकेदारों को भी जिम्मेदार ठहराया.

राहत की बात यह है कि मेयर ने शहर में पानी के संकट से इनकार किया है. उन्होंने बताया कि जलाशयों में फिलहाल 42 प्रतिशत जल भंडार मौजूद है. वहीं, कबूतरखानों के मुद्दे पर समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा.

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