मुंबई की मोनोरेल में भारी बारिश के बाद अचानक पावर सप्लाई ठप होने से ट्रेन बीच ट्रैक पर रुक गई और करीब 582 यात्री घंटों तक फंसे रहे थे. इस मामले में मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने एक हफ्ते पहले बारिश के बीच मुंबई में दो मोनोरेल में सैकड़ों यात्रियों के फंसने से संबंधित मामले में चूक के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

फिलहाल अधिकारियों ने बताया कि महानगर में मोनोरेल सेवाओं का संचालन करने वाले एमएमआरडीए ने 19 अगस्त की घटना की उच्च स्तरीय जांच भी शुरू कर दी है. 

‘स्नोर्कल’ सीढ़ी से 582 यात्रियों को बचाया गया

इस बाीच मैसूर कॉलोनी और भक्ति पार्क के बीच फंसी एक मोनोरेल से ‘स्नोर्कल’ सीढ़ी लगाकर 582 यात्रियों को बचाया गया था. इस बीच बचाव दल ने यात्रियों को बाहर निकालने के लिए खिड़कियां तोड़ दीं और ट्रेन के दरवाजे खोल दिए थे.

इस घटना के बाद सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार मोनो रेल में बार-बार तकनीकी खराबियों की चपेट में क्यों आ जाती हैं. मुंबई में मोनोरेल को मेट्रो की सहायक सेवा के तौर पर लाया गया था.

दो बड़े अधिकारी निलंबित

एक अन्य मोनोरेल को सफलतापूर्वक वापस खींचकर वडाला स्टेशन ले जाने के बाद 200 यात्रियों को निकाला गया था. इसके साथ ही अधिकारियों ने बताया कि सभी यात्रियों को निकाल लिया गया था, लेकिन इस घटना ने उनकी सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की प्रारंभिक समीक्षा के बाद, एमएमआरडीए ने मुख्य अभियंता (सिग्नल एवं दूरसंचार) मनीष सोनी और प्रबंधक (सुरक्षा) राजीव गीते को निलंबित कर दिया है.

उन्होंने कहा, ‘‘एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त ने पिछले सप्ताह घटना के दौरान अपनाई गई एसओपी की समीक्षा की और प्रारंभिक निष्कर्षों में परिचालन प्रोटोकॉल में खामियां सामने आने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.