मुंबई में मानसून की दस्तक के साथ ही शहर के सार्वजनिक परिवहन तंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा शुरू हो जाती है. भारी बारिश, जलभराव और तेज हवाओं के बीच लाखों यात्रियों की सुरक्षित और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होती है. इसी को देखते हुए मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण ने मेट्रो लाइन 2A, 2B, 7 और 9 के लिए व्यापक मानसून तैयारी योजना लागू कर दी है. इस बार खास बात यह है कि परंपरागत इंतजामों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

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इस वर्ष मेट्रो लाइन 2B और 9 के शुरू होने के बाद यह पहला मानसून होगा. ऐसे में एमएमआरडीए ने सभी चार परिचालित मेट्रो मार्गों पर विशेष तैयारी करने के निर्देश दिए हैं. यात्रियों की सुरक्षा, जलभराव रोकने, आपातकालीन स्थिति से निपटने और मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए कई स्तरों पर तैयारी की गई है.

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2,496 सीसीटीवी कैमरों से होगी 24 घंटे निगरानी

मानसून एक्शन प्लान के तहत 39 मेट्रो स्टेशनों पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. प्रत्येक स्टेशन पर 64 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इस तरह मेट्रो नेटवर्क पर कुल 2,496 कैमरे सक्रिय रहेंगे.

इन कैमरों की मदद से प्लेटफॉर्म, कॉन्कोर्स, स्टेशन परिसर और अन्य महत्वपूर्ण परिचालन क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी. किसी भी आपात स्थिति या असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच सकेगी.

मुंबई में मानसून के दौरान जलभराव सबसे बड़ी समस्या मानी जाती है. इसे देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर 30 आपातकालीन पंप तैनात किए गए हैं. स्टेशनों, डिपो और वायाडक्ट पर मौजूद जल निकासी नालों की सफाई कर दी गई है.

गाद, झाड़ियों और अन्य अवरोधों को हटाया गया है ताकि बारिश का पानी बिना रुकावट बाहर निकल सके. वायाडक्ट की सफाई का काम भी पूरा कर लिया गया है जिससे ट्रैक और संरचनाओं पर पानी जमा न हो.

बिजली और तकनीकी सिस्टम की पूरी जांच

एमएमआरडीए ने मानसून से पहले मेट्रो नेटवर्क पर लगे 1,070 इंसुलेटरों की जांच और रखरखाव पूरा कर लिया है. इसके अलावा 25 केवी केबल, पैंटोग्राफ, ट्रांसफॉर्मर और लाइटनिंग अरेस्टर की भी जांच की गई है. ट्रैक्शन सब-स्टेशनों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं. इससे खराब मौसम के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम होगी.

बारिश और तेज हवाओं की स्थिति पर नजर रखने के लिए 14 महत्वपूर्ण स्टेशनों पर एनीमोमीटर सिस्टम लगाए गए हैं. ये उपकरण हवा की गति को रियल टाइम में मापते हैं. मेट्रो अधिकारियों को मौसम की स्थिति की तत्काल जानकारी मिलेगी, जिससे जरूरत पड़ने पर परिचालन संबंधी फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे.

स्टेशनों पर रिसाव और ड्रेनेज की जांच पूरी

मानसून से पहले सभी स्टेशनों पर छत से पानी टपकने, प्लेटफॉर्म ड्रेनेज और संभावित जोखिम वाले स्थानों की जांच की गई है. जहां भी कोई कमी मिली, वहां सुधार कार्य पूरे किए गए हैं.

इसके अलावा अर्थिंग सिस्टम की जांच, मशीनरी की कंडीशनिंग और विभिन्न उपकरणों का निरीक्षण भी किया गया है ताकि बारिश के दौरान किसी तरह की तकनीकी समस्या न आए.

मेट्रो प्रशासन ने अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. मुख्य लाइन पर तीन और डिपो में दो मेट्रो ट्रेनें रिजर्व रखी गई हैं. कुल 5 ट्रेनें हर समय तैयार रहेंगी ताकि किसी भी तकनीकी खराबी या सेवा बाधा की स्थिति में तुरंत उनका उपयोग किया जा सके. बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए बैकअप सिस्टम भी तैयार रखे गए हैं.

यात्रियों को तुरंत मिलेंगे अपडेट

मानसून के दौरान यात्रियों को समय पर सूचना देना भी प्राथमिकता में रखा गया है. इसके लिए अपडेटेड स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू किया गया है. भारी बारिश, जलभराव या परिचालन से जुड़ी किसी भी जानकारी को डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, स्टेशन घोषणा प्रणाली और मोबाइल एप के जरिए यात्रियों तक पहुंचाया जाएगा.

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24x7 आपदा नियंत्रण कक्ष हुआ सक्रिय

एमएमआरडीए ने 25 मई से 15 अक्टूबर 2026 तक के लिए एक समर्पित 24 घंटे सक्रिय रहने वाला आपदा नियंत्रण कक्ष शुरू किया है. यह नियंत्रण कक्ष शिकायतों के निपटारे, आपातकालीन समन्वय और बृहन्मुंबई महानगरपालिका, पुलिस तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ संपर्क बनाए रखने का काम करेगा. ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान यह नियंत्रण कक्ष पूरी क्षमता के साथ काम करेगा.

किसी बड़ी आपदा या आपात स्थिति में मेट्रो नेटवर्क केवल यात्रियों के लिए ही नहीं बल्कि राहत एवं बचाव कार्यों के लिए भी उपयोग किया जा सकेगा. एमएमआरडीए ने विशेष मेट्रो कोच तैयार रखे हैं जिनका उपयोग बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आपदा प्रबंधन टीम को आवश्यक संसाधन पहुंचाने के लिए किया जा सकता है.

एआई करेगा ट्रेनों की तकनीकी निगरानी

इस बार मानसून तैयारियों की सबसे बड़ी खासियत एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल है. मेट्रो लाइन 2A और 7 पर एआई सक्षम ऑटोमेटेड पैंटोग्राफ कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है.

हाई-स्पीड कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह सिस्टम चलती ट्रेन के पैंटोग्राफ की जांच करता है. पहले जिस निरीक्षण में करीब 30 मिनट लगते थे, वह अब कुछ सेकंड में पूरा हो जाता है.

इससे संभावित तकनीकी खराबी का पहले ही पता चल जाता है और समय रहते मरम्मत की जा सकती है. इसका सीधा फायदा ट्रेनों की उपलब्धता और यात्रियों की सुरक्षा को मिलेगा.

एमएमआरडीए ने स्टेशनों और डिपो में एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम भी लागू किया है. यह सिस्टम गलत दिशा में चल रहे यात्रियों, पीली सुरक्षा रेखा पार करने वाले लोगों, लावारिस सामान, संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक रुकने वालों और मेट्रो उपकरणों के साथ छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों की पहचान कर सकता है. इससे सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले और मजबूत होगी.

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बताई बड़ी पहल

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र राज्य की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र हैं. ऐसे में हर मौसम में भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि एआई आधारित प्रणालियां, 24x7 निगरानी और जलभराव रोकने के उपाय मेट्रो नेटवर्क को और मजबूत बनाएंगे.

वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मानसून के दौरान सुरक्षित और निर्बाध मेट्रो सेवा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है. एआई आधारित पैंटोग्राफ मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद से तकनीकी समस्याओं का पता कुछ ही सेकंड में लगाया जा सकेगा, जिससे सेवाएं अधिक विश्वसनीय बनेंगी.

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यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर पूरा फोकस

एमएमआरडीए का कहना है कि इस व्यापक मानसून रणनीति का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और बिना किसी बाधा के यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है.

आधुनिक तकनीक, मजबूत इंजीनियरिंग उपायों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों के जरिए महा-मुंबई मेट्रो नेटवर्क को हर मौसम में सुचारू रूप से चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. बारिश हो या धूप, मुंबईकरों की यात्रा प्रभावित न हो, इसी लक्ष्य के साथ इस बार की मानसून तैयारी को अंतिम रूप दिया गया है.