नवी मुंबई के पनवेल उपजिला अस्पताल में डेडबॉडी एक्सचेंज होने का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जिससे दो परिवारों के बीच विवाद खड़ा हो गया. यह मामला तब शुरू हुआ जब सुशांत मल्लम के परिवार ने अस्पताल पहुंचकर देखा कि वह उनके बेटे का शव नहीं है.

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जांच करने पर पता चला कि सुशांत का शव बिशना रावत के परिजन ले गए थे, जिन्होंने कथित तौर पर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया था. स्वास्थ्य अधिकारी अशोक गीते ने बताया कि 20 अक्टूबर को खारघर के सुशांत मल्लम और न्यू पनवेल के सुरक्षा रक्षक बिशना रावत, दोनों ने आत्महत्या की थी.

परिवारों की पहचान में हुई गड़बड़ी

दोनों के शव पोस्टमार्टम के लिए लाए गए थे. चिकित्सकों ने बिशना रावत के परिजनों को शव ले जाने को कहा. रावत के परिजनों ने वीडियो के सामने शव की पहचान की और सुशांत मल्लम का शव लेकर चले गए. सुशांत के परिजन नेपाल में होने के कारण चार दिन बाद अस्पताल पहुंचे और शव को पहचानने से इनकार कर दिया.

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अस्पताल ने कराई समझौता बैठक

चूंकि दोनों परिवार नेपाली थे और एक ही दिन घटना हुई थी, इसलिए अस्पताल प्रशासन से यह चूक हुई. हालांकि, बाद में अस्पताल प्रशासन ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराया. दोनों परिवार अंततः एक साथ बचे हुए शव का अंतिम संस्कार करने के लिए सहमत हुए और डेडबॉडी लेकर गए. 

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