केंद्र सरकार के FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) से जुड़े प्रस्तावित बिल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस जहां इसे ईसाई संगठनों को निशाना बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि FCRA किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होता है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि FCRA बिल लाने का मुख्य उद्देश्य विदेशी चंदे के गलत इस्तेमाल को रोकना है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थाएं लगातार विदेशों से फंड ला रही हैं और उसका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा है.
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'इस बिल से किसी को परेशानी नहीं होगी'
फडणवीस ने कहा कि जो संगठन देशहित में काम कर रहे हैं और अपने फंड का सही हिसाब-किताब देते हैं, उन्हें इस बिल से किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि FCRA के नियम पहले की तरह लागू रहेंगे और नियमों का पालन करने वाले संगठनों को लाइसेंस मिलते रहेंगे.
"यह सिर्फ ईसाई संस्थाओं का मुद्दा नहीं"
FCRA को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने कहा कि यह कानून किसी खास धर्म या समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है. उन्होंने कहा कि विदेशी चंदा लेने वाले हर संगठन को FCRA के नियमों का पालन करना होगा. उन्होंने कहा कि FCRA केवल ईसाई संगठनों पर लागू नहीं होता, बल्कि सभी धार्मिक, सामाजिक और गैर सरकारी संगठनों पर समान रूप से लागू होता है. जो भी संस्था विदेश से फंड प्राप्त करती है, उसे सरकार के तय नियमों के अनुसार काम करना होगा.
संसद में अपनी बात रख सकता है विपक्ष
फडणवीस ने विपक्षी दलों से कहा कि अगर किसी को इस बिल को लेकर आपत्ति है तो वह संसद में अपनी बात रख सकते हैं. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है और सरकार सभी पक्षों को सुनने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं है, बल्कि विदेशी फंड की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.
FCRA बिल पर बढ़ी राजनीतिक तकरार
FCRA बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. कांग्रेस-सपा का आरोप है कि इस कानून के जरिए कुछ समुदायों और संस्थाओं को निशाना बनाया जा सकता है. वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह कदम विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकने और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए उठाया जा रहा है. अब नजर संसद में होने वाली बहस पर है, जहां सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर आमने-सामने नजर आ सकते हैं.
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