मुंबई के 81 साल के डॉ. राज बोथरा की कहानी, भारत के पद्मश्री डॉक्टर को क्यों जाना पड़ा जेल?
Mumbai News: मुंबई के 81 साल के डॉ. राज बोथरा की आत्मकथा USA v Raj प्रकाशित हुई, जिसमें उनके 1,301 दिन जेल में रहने के बाद निर्दोष साबित होने की कहानी है. इसका फिल्म रूपांतरण TIFF में पेश किया गया है.

मुंबई के 81 साल के पद्मश्री डॉ. राज बोथरा का जीवन, जो कभी चिकित्सा सेवा और समाजसेवा की मिसाल माना जाता था, दिसंबर 2018 में अचानक बदल गया जब उनके दरवाजे पर एक अप्रत्याशित दस्तक ने सब कुछ छीन लिया.
दशकों तक सर्जन और इंटरवेंशनल पेन विशेषज्ञ के रूप में लोगों को ठीक करने, परोपकार और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में जुटे डॉ. बोथरा को अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में राष्ट्रपति के.आर. नारायणन सेपद्मश्री से सम्मानित किया गया था.
डॉ राज बोथरा की सेवाओं से समाज को लाभ
डॉ. राज बोथरा ने अमेरिका और भारत, दोनों जगहों पर चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ी. उन्होंने नरगिस दत्त फाउंडेशन की स्थापना में मदद की, मदर टेरेसा फाउंडेशन के साथ काम किया और निकोटीन, एड्स और शराब विरोधी जनजागरूकता अभियानों का नेतृत्व किया.
वे भारतीय प्रधानमंत्रियों, अमेरिकी राष्ट्रपतियों, मदर टेरेसा और पोप जॉन पॉल द्वितीय जैसे कई प्रभावशाली व्यक्तित्वों के साथ काम कर चुके हैं और भारत व अमेरिका, दोनों जगहों पर उन्हें अनेक पुरस्कार मिले.
2018 में अमेरिका में FBI ने उन्हें झूठे आरोपों पर गिरफ्तार
लेकिन इन सब उपलब्धियों के बावजूद, दिसंबर 2018 में अमेरिका में FBI ने उन्हें झूठे आरोपों पर गिरफ्तार कर लिया. 1,301 दिनों तक उन्हें गलत तरीके से जेल में रखा गया, परिवार से अलग कर दिया गया और उनका सब कुछ छिन गया. अंततः जून 2022 में बारह अमेरिकी नागरिकों की ज्यूरी ने सर्वसम्मति से उन्हें निर्दोष करार दिया.
अब डॉ. बोथरा की आत्मकथा USA V Raj भारत में प्रकाशित हुआ. इस किताब का अनावरण 23 सितंबर को मुंबई के JW मैरियट में अभिनेता अनुपम खेर और तुषार कपूर के हाथों किया गया यह क्षण डॉ. बोथरा के लिए एक भावुक वापसी थी, क्योंकि इसी विश्वास, संस्कृति और परिवार ने उन्हें उनके जीवन के सबसे अंधेरे दौर में संभाला.
मुश्किलों के बीच डॉ बोथरा ने नहीं खोई उम्मीद
इसी अवसर पर किताब के फिल्म रूपांतरण की घोषणा भी हुई, जिसे हाल ही में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में पेश किया गया था. डॉ. बोथरा याद करते हैं कि मेरा पूरा संसार टूट गया, परिवार बर्बाद हो गया, कारोबार बंद हो गए और बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए गए.
उन्होंने कहा कि मुझे कहा गया कि अगर मैंने दोष स्वीकार नहीं किया तो जेल में ही मर जाऊंगा. मैंने जवाब दिया कि तो ऐसा ही सही. मुझे सहारा दिया इस विश्वास ने कि आखिरकार सच्चाई ही जीतेगी. मैं उस देश से आता हूं जहां इज्जत और सम्मान जीवन से भी अधिक महत्वपूर्ण हैं.
किताब के माध्यम से न्याय और इंसानियत की बात कही
डॉ. बोथरा ने किताब लिखने का उद्देश्य साझा करते हुए कहा कि मैंने यह किताब इसलिए लिखी ताकि अमेरिका के आम लोग सच जान सकें. अगर मुझे ही वहां की कठोर न्याय प्रणाली का अंदाजा नहीं था, तो आम लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं होगी. अगला शिकार कोई भी हो सकता है.
उनके अनुसार यह केवल कानूनी सुधार की बात नहीं है, बल्कि एक नैतिक पुकार है, “हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है ‘हर हाल में जीत’ वाली सोच को बदलना. यह बदलाव किसी कानून से नहीं आ सकता, इसे हमारे दिल से आना होगा. इंसानियत और न्याय की चाह ही हमें एक बेहतर और निष्पक्ष भविष्य की ओर ले जाएगी.
फिल्म में डॉ बोथरा की जिंदगी और विरासत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत
फिल्म रूपांतरण में दिग्गज अभिनेता कबीर बेदी डॉ. राज बोथरा का किरदार निभाएंगे. जंगल क्राई फेम एमिली शाह उनकी बेटी सोनिया बोथरा का किरदार निभाएंगी. वहीं अंकुर भाटिया (वेब सीरीज आर्या से प्रसिद्ध) भी फिल्म का हिस्सा होंगे.
फिल्म का निर्देशन मशहूर सिनेमैटोग्राफर रवि के. चंद्रन करेंगे और निर्माण प्रशांत शाह (बॉलीवुड हॉलीवुड प्रोडक्शंस) तथा ट्विंकनहैम प्रोडक्शंस के सहयोग से किया जाएगा. पटकथा और संवाद जिल्ले-हुमां, शुभो दीप पाल, हुसैन दलाल और अब्बास दलाल लिखेंगे और ऑस्कर विजेता रेसुल पुकुट्टी साउंड डिजाइन संभालेंगे.
फिल्म की शूटिंग भारत और ब्रिटेन में होगी, जो डॉ. बोथरा के जीवन और विरासत की अंतरराष्ट्रीय गहराई को दर्शाएगी.






















