महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार (12 अगस्त) को घोषणा की कि अगर मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान नहीं रखते हैं, तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे. जिन ड्राइवरों को मराठी बोलने का व्यावहारिक कौशल या काम-चलाऊ ज्ञान नहीं है, उन्हें पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा.

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अगर कोई ड्राइवर उस महीने के भीतर भाषा नहीं सीख पाता है, तो उनके लाइसेंस का अधिकार तीन महीने तक के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा. अब इस फैसले के बाद ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी सीखने की समय सीमा नजदीक आने पर एक टैक्सी चालक ने कहा, "हम सरकार से सहमत हैं, लेकिन उन्होंने हमें मराठी सीखने के लिए 1-2 दिन का समय दिया.

उन्होंने कहा, "हमें एक दिन बुलाया, थोड़ा-बहुत सिखाया और फिर समय सीमा तय कर दी. 1-2 दिन में मराठी नहीं सीखी जा सकती. इसे सीखना आवश्यक है. और ग्राहकों की बात करें तो, वे गाड़ी में आकर बैठते हैं और हिंदी में बात करते हैं. अगर वे हिंदी में बात करेंगे, तो हम उनसे मराठी में कैसे बात करेंगे?"

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मराठी भाषा की अनिवार्यता पर क्या बोले चालक?

मराठी भाषा की अनिवार्यता पर ऑटो चालक ने कहा, "मराठी यहां की अनिवार्य भाषा है औऱ इसे सीखना जरूरी है. कोई हमसे मराठी में बात करेगा तो उसका जवाब हमें देना पड़ेगा. इसलिए मराठी सीखना जरूरी है. मुझे अच्छे से तो नहीं आती है लेकिन थोड़ा-थोड़ा बोल पाते हैं. मैंने दो चार बार सीखी है तो समझ आ रही है."

एक अन्य टैक्सी चालक का कहना है कि लाइसेंस भी फिर मराठी में होना चाहिए. मराठी ग्राहक भी हिंदी ही बोलता है वो मराठी नहीं बोलता. उसने कहा भारत की राष्ट्र भाषा हिंदी है. भारत में कहीं भी जाकर हम हिंदी में बात कर सकते हैं. मराठी बोलना जरूरी है लेकिन सरकार को इतना जरूरी नहीं करना चाहिए. ये गलत है.

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