बॉम्बे हाईकोर्ट में मंत्रालय की कैंटीन को लेकर सुनवाई के दौरान बड़ा मामला सामने आया. एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) ने कोर्ट में दावा किया था कि मंत्रालय की कैंटीन में एक भी कीड़ा नहीं मिला है. इसके बाद हाईकोर्ट ने कैंटीन की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया. कोर्ट के निर्देश पर 4 वकीलों और एफडीए के अधिकारियों की टीम ने कैंटीन का निरीक्षण किया.
निरीक्षण के दौरान कैंटीन में मक्खियां पाई गईं. इसके अलावा सब्जियां काटने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे चाकू भी बेहद पुराने और जंग लगे हुए मिले. जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई, जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर की.
राहुल गांधी पर संजय राउत की दो टूक, 'ऐसा व्यक्ति कभी...'
हाईकोर्ट ने एफडीए के सामने रखे दो विकल्प
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा, “या तो मंत्रालय के उपाहारगृह का लाइसेंस निलंबित करें या फिर सिर्फ केले पर काले धब्बे होने के कारण जिनका लाइसेंस रद्द किया गया है, उनके लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लें. कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए. इसमें वीआईपी कल्चर की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. वीआईपी लोगों के लिए कानून बिल्कुल भी अलग नहीं होना चाहिए.”
कोर्ट ने आगे कहा, “हम अब एफडीए के अधिकारियों को चेतावनी दे रहे हैं. इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण चाहिए.”
निरीक्षण में सामने आईं कई और खामियां
कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में निरीक्षण के लिए गए वकीलों ने बताया कि मंत्रालय की कैंटीन की फर्श की टाइलें टूटी हुई थीं. फ्रिज में गंदगी थी और पानी के नलों की ठीक से मरम्मत नहीं की गई थी. नलों से लगातार पानी का रिसाव भी हो रहा था.
इस पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा, “कानून में भेदभाव नहीं हो सकता. मंत्रालय में ड्रेनेज पाइपलाइन टूटी हुई है, पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है और उसी जगह बर्तन धोए जा रहे हैं.”
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्तियों ने फ्रिज की तस्वीरें दिखाते हुए एफडीए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा, “इससे ज्यादा साफ तो चप्पलों का स्टैंड होता है.”
सोलापुर में ट्रक से भिड़ी एसटी बस, 2 की मौत, रिफ्लेक्टर बना वजह
सुधार का मौका देने की भी कही बात
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी जगह अनियमितता मिलने पर पहले नोटिस देकर कम-से-कम एक बार चेतावनी दी जानी चाहिए और सुधार का अवसर मिलना चाहिए. कोर्ट ने कहा, “हम भी लोगों को दूसरा मौका देते हैं. यदि आप सीधे लाइसेंस रद्द कर रहे हैं, तो यह उचित नहीं है.”
कोर्ट ने एफडीए के काम की सराहना भी की, लेकिन साफ कहा, “आप अच्छा काम कर रहे हैं, यह हमें स्वीकार है. किसी न किसी को यह काम करना ही चाहिए, लेकिन इसमें सभी को समान न्याय मिलना चाहिए.”
